सूर्पणखा नकसिका भंग और खर दूषण वध की सुंदर लीला का मंचन

तनुज कुमार


कांधला / जनपद शामली
बीते शनिवार को श्रीरामलीला कमैटी पंजाबी धर्मशाला के तत्वधान में भगवान श्री गणेश व राम लक्षमण की आरती के पश्चात लीला मंचन कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रालोद के वरिष्ठ नेता डॉ विक्रांत जावला ने भगवान राम की आरती कर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीला का मंचन राम के आदर्शों को जनमानस तक पंहुचाना है और जनमानस को चाहिये कि राम की लीलाओं को ह्रदय में धारण कर उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे चले। उन्होने कहा कि कांधला की रामलीला ऐतिहासिक धरोहर है। श्री रामलीला मंचन स्थल पर सर्वप्रथम जयंती लीला का मंचन प्रस्तुत किया गया।जिसमें इंद्र का पुत्र जयंत भगवान श्री हरि नारायण के पृथ्वी पर अवतार लेने पर संदेह व्यक्त करता है। और पंचवटी पहुंचकर माता सीता के अंगूठे में अपनी चोंच मारकर लहूलुहान कर देता है। जिससे क्रोधित होकर भगवान श्रीराम जयंत पर अग्निबाण का संधान कर छोड़ देते हैं। इंद्र का पुत्र जयंत पूरे ब्रह्मांड में अपनी सहायता के लिए जाता है। लेकिन उसकी कोई सहायता नहीं करता है। अंत मे श्री राम भगवान की शरण में जाने के बाद भगवान राम उसकी एक आंख फोढ़ कर अभय दान देकर छोड़ देते हैं। तत्पश्चात रावण की बहन सुपनखा राम, लक्ष्मण के सुंदर स्वरूप पर मोहित होकर प्रेम विवाह प्रस्ताव लेकर पहुंचती है। लेकिन दोनों के द्वारा विवाह प्रस्ताव मनाकर देने पर राक्षसी सुपनखा अपना राक्षस रूप धारण कर माता सीता पर हमला करती है।

 

 

तो लक्ष्मण जी अपनी तलवार से उसके नाक कान काट देते हैं। जिसकी दुहाई लेकर घायल सुपनखा अपने भाई खर दूषण के पास दंडक वन पहुंचती है। और अपने साथ घटित पूरी घटना सुनाकर राम और लक्ष्मण से बदला लेने की बात कहती है। खर दूषण राम लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए पंचवटी पहुंचते हैं अंत में भगवान राम के हाथों दोनों का वध हो जाता है। रामलीला मंचन स्थल पर मंचन देखने के लिए भारी-भरकम भीड़ उमड़ पड़ी। लीला मंचन में खर दूषण का रंगारंग दरबार आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान राम हरि बल्लभ शर्मा, जानकी योगेश शर्मा, लक्ष्मण तन्मय शर्मा, गुरु जी विष्णु शर्मा, लोहवन धाम मथुरा, व खर दूषण प्रदीप कुमार सिंघल, अनिल कुमार मित्तल, श्रीकांत आदि दर्जनो लोग उपस्थित रहे।

 

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