खेती व पशुपालन से जुड़ी महिलाओं ने सिलाई में भी हुनर दिखाया, बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म सिलवानी है तो सीमांत पिथौरागढ़ जिले के रियासी गांव आ सकते हैं

  • संतोष साह

पिथौरागढ़ जिले के गांव सियासी से यह संदेश आ रहा है कि यदि स्कूल के बच्चों की यूनिफॉर्म या फिर अन्य जनों ने कपड़े सिलवाने हैं तो यहाँ की महिलाएं जो कि खेती व पशुपालन का काम करती थी उन्होंने सिलाई में भी हुनर दिखा दिया है। प्रशिक्षण लेने के बाद अब यहाँ की महिलाएं सिलाई में भी पारंगत हो गई हैं। खेती व पशुपालन से जुड़ी इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि उन्हें केवल अवसर चाहिये हुनर तो उनके भीतर पहले से मौजूद है।

गौरतलब है कि ओएनजीसी देहरादून के सहयोग से मूनाकोट ब्लॉक के ग्राम पंचायत रियासी की 60 महिलाओं का सिलाई प्रशिक्षण के लिये चयन किया गया था। जिसके बाद दो टीमें बनाकर इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्य के लिये गैर सरकारी संस्था सोसाइटी फार एक्शन इन हिमालय को आयोजक बनाया गया। संस्था की प्रशिक्षक तुलसी साह ने शुरुआती एक माह में महिलाओं को परिवार के उपयोग में आने वाले कपड़े बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और उसके बाद दो माह तक स्कूल यूनिफॉर्म के प्रशिक्षण पर फोकस किया गया।

इस गांव की खेती बाड़ी करने वाली टेलर मास्टर बनी 44 वर्षीय गीता देवी ने कहा कि इस उम्र में सीखने की ललक मन में थी मगर डर उम्र का था वह डर भी खत्म हुआ और वह सिलाई सीख गई। गांव की 24 साल की प्रियंका खड़ायत ने सिलाई सीखने के बाद अपने ससुर के लिये पैंट-शर्ट बना दी जिसे पहनकर जब वे बाजार गए तो उसे खुशी हुई। 36 वर्ष की आशा बिष्ट ने अपनी 14 साल की बेटी के लिये पैंट,40 साल की ममता बिष्ट ने अपने बेटे के लिये पैंट, हाफ पैंट व अपने लिये सूट भी सिला। संस्था के अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने बताया कि इस गांव की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये बुनियादी ढांचा बना रहे हैं। उन्होंने महिलाओं के कौशल विकास में ओएनजीसी के सहयोग पर आभार जताया।

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