रावण देहूति संवाद की सुन्दर लीला का मंचन

तनुज कुमार

कांधला। संवाददाता
बीते शनिवार की रात को मौहल्ला शेखजादगान में श्रीरामलीला कमैटी पंजाबी धर्मशाला के तत्वधान में आयोजित श्रीरामलीला मंचन कार्यक्रम में भगवान श्री गणेश और श्री विष्णु भगवान की आरती के पश्चात लीला मंचन कार्यक्रम का शंुभारंभ किया गया। रात्रि लीला मंचन कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के द्वारा रावण, कुम्भकर्ण, विभिषण तीनों भाईयों के द्वारा ब्रह्रमा की घोर तपस्या करने के पश्चात वरदान प्राप्त करते है। इसके पश्चात रावण विश्व भ्रमण के लिये निकलता है। जंहा उसकी कु दृष्टि विष्णु भक्त देहूति पर पड़ती है। रावण देहूति को अपने साथ जबरन ले जाने का प्रयास करता है। लेकिन देहूति अगले जन्म में सीता का रूप लेकर उसके नाश का कारण बनने का शाप देकर आत्मदाह कर लेती है।

 

तत्पश्चात रावण लंका पंहुचकर अपने मेघानाथ को इन्द्रराज को बंदी बनाने का आदेश देता है। जिसके बाद मेघनाथ और इन्द्र के बीच भंयकर युद्ध होता है। अन्त में मेधनाथ अपनी शक्ति से इन्द्र को बंदी बनाकर लंका ले आता है। मेधनाथ अपने पिता रावण का आज्ञा पाकर राज कर के रूप में ऋषियों को खून पात्र में एकत्रित कर लेता है और उसे मिथलापुरी में दबाकर लंका चला जाता है। जिसके बाद राजा जनक के घर सीता का जन्म होता है। कार्यक्रम का संचालन गुलशन खन्ना ने किया। इस दौरान अध्यक्ष मोहनलाल चावला, प्रबंधक प्रदीप कुमार सिंघल, विष्णु प्रकाश अग्रवाल, उप्रबन्धक कुशांक चौहान, भाजपा मड़ल अध्यक्ष डॉक्टर रश्मिकांत जैन, पंडित राधेश्याम शर्मा, महावीर प्रसाद अग्रवाल, डॉ0 रणवीर सिंह, जितेन्द्र चौधरी, जितेन्द्र सैनी, ललित शर्मा, देवेन्द्र जैन आदि दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

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