उत्तरकाशी : अक्षय तृतीया पर श्री परशुराम जयंती कोविड की वजह से सादगी से सम्पन्न,कोरोना की समाप्ति के लिये किया हवन

  • संतोष साह

उत्तराखंड का एकमात्र परशुराम मंदिर उत्तरकाशी में है। उत्तरकाशी में काशी विश्वनाथ भी विराजमान हैं। जिनके परम भक्त व शिष्य परशुराम हैं। जिनके रौद्र स्वभाव के सौम्य हो जाने के कारण ही उत्तरकाशी को सौम्यकाशी भी कहा जाता है। उत्तरकाशी में स्थित परशुराम मंदिर के गर्भगृह में स्थित मूर्ति 11-12 वीं शताब्दी की बताई जाती है। यहाँ एक ही शिलाखंड पर भगवान श्री विष्णु के अंशावतारों को उत्कीर्ण किया गया है। मंदिर में स्थित शिलापट्ट पर अंकित संवत 1899 से ज्ञात होता है कि इसी वर्ष मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ होगा। मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित ताम्रलेख पर संवत 1742 उत्कीर्ण है। यह जानकारी शैलेन्द्र नौटियाल ने दी।

इधर आज अक्षय तृतीया के अवसर पर श्री परशुराम जयंती के पर्व कोविड -19 की वजह से सादगी से सम्पन्न किया गया। मंदिर में नवीन ध्वजारोहण भी हुआ साथ ही सम्पूर्ण विश्व की सुख समृद्धि व कोरोना महामारी की समाप्ति के लिये हवन भी किया गया। इस मौके पर बुद्धि सिंह पंवार, शैलेन्द्र नौटियाल, महेंद्र पाल सिंह सजवाण, अनूप नौटियाल, अनिल बहुगुणा, नवीन नौटियाल, गणेश नौटियाल, संदीप भट्ट आदि उपस्थित थे।

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