उत्तरकाशी : नचिकेताताल में मनाया गया बैशाखी पर्व,उत्तरकाशी व टिहरी के ग्रामीण देव-डोलियों को लेकर यहां पहुंचते हैं

  • संतोष साह

समुद्रतल से दो हजार मीटर की ऊंचाई में स्थित चौरंगीखाल के नजदीक नचिकेता ताल का बड़ा धार्मिक महत्व है। हर साल बैशाखी पर्व पर यहाँ मेला आयोजित होता है। इस मेले में उत्तरकाशी व टिहरी के ग्रामीण अपने इलाके के देव डोलियों के साथ पहुंचते हैं।

दोनो जिलों की सीमा से लगा यह स्थान है। यहाँ धार्मिक जनश्रुतियों में कहा जाता है कि नचिकेता ने जन्म व मृत्यु के भेद को जानने के लिये इसी स्थान पर तपस्या की थी। नचिकेताताल में यम द्वार होने की भी कथा प्रचलित है।

नचिकेता ताल मंदिर समिति के तत्वावधान में प्रत्येक साल यहाँ ताल के चारों ओर मेला लगता है। इस साल मेले के अवसर पर यहाँ हरि महाराज की देव डोली,नागराज,चौरंगी नाथ व चदनी नाग की देव डोलियों समेत अन्य देव डोल ढोल बाजों के साथ शामिल हुए। बैशाखी के इस मेले में नचिकेता ताल में जमे सेवाल को लोग प्रसाद के रूप में अपने घर ले गए।

उधर पीने के पानी की किल्लत होने के बावजूद यहाँ मेले में चाउमीन,जलेबी,पकोड़ी,चाय की दुकानें भी लगी। चूड़ी-बिंदी,खिलोने बेचने वाले फड़ भी यहाँ दिखाई दिए।
मेला समिति के अध्यक्ष अंकित पंवार ने बताया कि सरकार को यहां पीने के पानी व गेस्ट हाउस तथा मंदिर का निर्माण करना चाहिए। मेले में पहुंचे भाजपा नेता लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने चौरंगी से नचिकेता तक चार किलोमीटर के ट्रैक को बेहतर बनाने के साथ उसमें रेलिंग लगाने की आवश्यकता बताई।

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