उत्तरकाशी : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहुंचे गढ़वाली भाषा में रामलीला की कार्यशाला में,विधाओं को संरक्षित करने के साथ ही नए प्रयास की सराहना की

  • संतोष साह

सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी आज शाम गढ़वाली भाषा व बोली में श्री आदर्श रामलीला समिति द्वारा रेस कोर्स में की जा रही कार्यशाला में पहुंचे और उन्होंने इस प्रयास के लिए समिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधाओं को संरक्षित करना आज चुनौती बन गई है मगर जिस तरह से रामलीला समिति उत्तरकाशी ने आधुनिकता के इस दौर में कदम उठाया है और स्थानीय भाषा में कार्यशाला के जरिए रामायण आदि का संकलन कर उसे गढ़वाली भाषा व बोली में अनुवाद किया जा रहा है वह काबिले तारीफ है।

उन्होंने कहा कि इस संकलन से जो किताब उभर कर आएगी उसको लेकर वे विधायकों से कहगें कि एक क्लब बनाकर इस नए साहित्य को प्रचारित करने में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ ही हम सब का भी कर्तव्य बनता है कि सालो से चलने वाली रामलीलाओं व इसकी विधाएं भी संरक्षित हो। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी में भी रामलीला का बढ़ा महत्व रहा। गांधी ने अपने विभिन्न संग्रहों में भी रामायण से लेकर रामलीला को भी स्थान दिया। उन्होंने स्व.जयप्रकाश नारायण को तक रामलीला देखने को कहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में मुख्मंत्री रहते पुरानी विधाओं को सक्रिय करने से लेकर लोक कलाकारों,वाद्य यंत्रों, रामलीलाओं का भी ध्यान रखा ताकि हमारी लोक कला,संस्कृति कायम रह सके। उन्होंने अपने संबोधन में समिति के द्वारा उठाए गए इस कदम को बेहतर बताया। इस दौरान उन्होने कार्यशाला में स्थानीय भाषा में तैयार किए जा रहे संकलन को भी देखा। पूर्व मुख्यमंत्री के साथ विधायक प्रीतम पंवार भी मौजूद थे तो वहीं कार्यशाला के संयोजक जयेंद्र सिंह पंवार ने पूर्व मुख्यमंत्री को कार्यशाला से अवगत कराया।
इस दौरान कार्यशाला के प्रतिभागी समिति के अध्यक्ष गजेंद्र मट्डा,दिनेश नौटियाल,कैलाश सेमवाल,विजय चौहान,विक्रम शाह,राधा वल्लभ नौटियाल,प्रताप सिंह रावत,कमल सिंह रावत, बचन लाल भटवान,महेंद्र सिंह पंवार,केशर सज वाण,अरविंद राणा भी उपस्थित थे।

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