उत्तरकाशी : हरि महाराज के चरणों मे दिव्य कथा का आयोजन,आचार्य दुर्गेश बोले ब्रह्मांड में मां गंगा जैसी पवित्र वस्तु और कोई नहीं,कथा में अध्यक्ष जिला पंचायत टिहरी व उत्तरकाशी भी हुए शामिल

 

  • संतोष साह

 

हरिमहाराज के चरणों मे कथा का श्रवण करते हुए राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य ने कहा कि इस ब्रह्मांड में सबसे पवित्र वस्तु मां गंगा है, भगवान शिव ने इसीलिए मां गंगा को अपने मस्तक पर धारण किया है, शैव दर्शन कहता है कि यदि बुद्धि में गंगा जैसी पवित्रता रहे तो यह बुद्धि बुरे मार्ग पर नहीं जाएगी अतः मनुष्य यदि अपना कल्याण चाहता है तो बुद्धि में माँ गंगा जैसी पवित्रता रखें… भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र है, चंद्र का तात्पर्य तपोमय जीवन से है भगवान शिव का दर्शन है कि आप गृहस्थ जीवन में भी रहकर साधना मय जीवन व्यतीत कर सकते हैं, क्योंकि महादेव भी गृहस्थी ही हैं!

भगवान शिव ने अपने अंग पर चिता की भस्मी धारण की है , भगवान विश्वनाथ का दर्शन है कि इस शरीर को हम कितना भी सुंदर सजाएं अंत में इस शरीर को मुट्ठी भर राख ही बनना है.. इसलिए भगवान शिव ने शरीर पर चिता की राख लगाई है.. महादेव के कंठ में काले-काले नाग राजा विराजते हैं, नाग का अर्थ है काल स्वरूप अर्थात मनुष्य को कभी भी अपनी मृत्यु को नहीं भूलना चाहिए जो व्यक्ति सदैव मृत्यु को याद करता है वह अधिकतर पापों से दूर हो जाता है..

डॉ दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि भगवान शिव के हाथ में जो त्रिशूल है वह तीन शूलों का प्रतीक है अर्थात जो महापुरुष दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों प्रकार के शूल अपनी मुट्ठी में करके रखता है वही श्रेष्ठ है … जो दिव्य महापुरुषों पावन और पावन को साथ में लेकर चले अर्थात गंगा जैसी पवित्र वस्तु और श्मशान की राख जैसी अपवित्र वस्तु दोनों को जो धारण करें वही विश्वनाथ हो सकता है… भगवान नारायण श्रृंगार प्रिय है वो विश्वनाथ नहीं कहलाते विश्वनाथ तो केवल भगवान शिव ही कहलाते हैं…

उधर इस दिव्य कथा में हजारों भक्त पहुंच रहे है जिसमे केवल बाड़ागड्डी क्षेत्र ही नहीं अपितु संपूर्ण उत्तरकाशी और उत्तराखंड से भगवान हरि महाराज के चरणों में भक्त पधार रहे हैं। इस बीच कथा में सोना सजवाण अध्यक्ष जिला पंचायत नई टिहरी, रघुवीर सिंह सजवाण के अलावा दीपक बिजल्वाण अध्यक्ष जिला पंचायत उत्तरकाशी भी पहुंचे और इन्होंने हरि महाराज का आशीर्वाद भी लिया। .

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