हनुमान जी ने जलाई रावण की र्स्वण लंका

तनुज कुमार   कांधला /शामली

मंगलवार को नगर के पंजाबी धर्मशाला के मंचन स्थल पर भगवान राम की आरती के बाद सुग्रीव के आदेश पर हनुमान, अंगद, जामवंत सहित सीता की खोज करने के लिये समुन्द्र तट पर पंहुच जाते है। जंहा उनकी भेट़ जटायु के भाई सांम्पाती से होती है। सांम्पाती उन्हे माता सीता की जानकारी देकर लंका जाने के लिये कहता है। जिसके पश्चात अथाह सागर को लागने में असर्मथता व्यक्त करते हुए जामंव हनुमान जी शक्तियों को याद दिलाते है। हनुमान जी समुंदर पार कर कर लंका पहुंच जाते हैं, जहां सबसे पहले उन्हें एक कुटिया में राम नाम का जाप कर रहे विभीषण मिलते हैं।

 

 

हनुमान जी बताते हैं कि मैं सीता जी की खोज में लंका आया हूं। विभीषण बताते है कि रावण ने अशोक वाटिका में माता जानकी को रखा हुआ है। जिसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका में जाकर माता सीता को भगवान राम की अंगूठी देकर उन्हे विश्वास दिलाते है कि वह रामदूत है। हनुमान जी भूख लगने पर पूरी अशोक वाटिका को उजाड देते है। माली के कहने पर रावण पुत्र अक्षकुमार आता है जो हनुमान जी के हाथों पर मारा जाता है। रावण अपने बडे पुत्र मेघनाथ को अशोक वाटिका में भेजता है। मेधनाथ बह्रमपास में हनुमान जी को बांधकर रावण दरबार ले जाता है। जंहा पर रावण हनुमान जी के पूंछ में आग लगवा देता है। हनुमान जी अपनी जली हुई पूंछ से पूरी लंका को जलाकर राख कर देते है। और माता जानकी से चूडामणी लेकर रामदल पंहुच जाते है। इस दौरान पंड़ित हरिवल्लभ, तन्मय, भोला, सर्वेश वर्मा आकाश सिंघल, बाबू, मदन सैनी, नवीन सहित कई कलाकारों ने अभिनय प्रस्तुत किया।

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