उत्तरकाशी : भारत-तिब्बत के बीच कभी आवाजाही की निशानी रही गरतांग गली को पर्यटकों की पहुंच तक लाने के लिये दिवंगत विधायक गोपाल को याद किया जाएगा

 

  • संतोष साह

 

अभी हाल में गरतांग गली का सौन्दर्यकरण हो जाने और इसे इसके पुराने लुक में लाने के उपरांत पर्यटकों के लिये खोले जाने के बाद पुरानी यादें ताजा हुई हैं। गौरतलब है कि 1962 से पूर्व नेलांग घाटी के भारत-तिब्बत सीमा के बीच कई दर्रों से होकर आवाजाही हुआ करती थी। भारत-तिब्बत के बीच व्यापार भी होता था। स्थानीय उत्तरकाशी जिले के सुप्रसिद्ध माघ मेले में भी तिब्बत के व्यापारी व्यापार करने आया करते थे। इन दर्रों में एक गरतांग गली भी हुआ करती थी जो 1962 से पूर्व आवाजाही का साधन हुआ करती थी। यह गरतांग गली प्राचीन कला की एक मिशाल होने के साथ ही आकर्षण का केंद्र थी। 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सुरक्षा व सामरिक दृष्टि से यहां गरतांग गली से आवाजाही रोक दी गईं। इससे पूर्व पड़ने वाले गांव जाडुंग को भी वहाँ से घाटी में शिफ्ट कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि एक लंबे अरसे तक यह गली मानव रहित होने से जीर्ण-शीर्ण हो गई। इधर उत्तराखंड बनने के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये सरकारें पर्यटन में जोर देने की बात करती रही। पर्यटन को रोजगार से जोड़ने पर भी बल दिया गया। उत्तरकाशी में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को भी तलाशने के काम शुरू हुआ। इनमें एक गरतांग गली भी शामिल है। जिसको पर्यटन के नक्शे में लाने से लेकर इसको पुर्नजीवित करने के लिये दिवंगत विधायक गोपाल रावत हर संभव कोशिश की फलस्वरूप आज यह गरतांग गली पर्यटकों के लिये खोल दी गई है। हालांकि अभी गाइड लाइन की एसओपी के तहत यहाँ एक सीमित संख्या में पर्यटक जा सकेंगे मगर भविष्य में प्राचीन नक्काशी के इस आकर्षण के केंद्र में साहसिक पर्यटन को कहीं अधिक लाभ मिलेगा और पर्यटकों की तादाद भी बढ़ेगी। पर्यटन, होटल व्यवसाय ,ट्रेकिंग से जुड़े अधिकांश लोगों,साहसिक पर्यटन से जुड़े ट्रैकर व पर्यटन प्रेमी गरतांग गली का क्रेडिट दिवंगत गोपाल को समर्पित होना मानते हैं। इनकी राय में गरतांग गली को पर्यटन के नक्शे में लाने के साथ ही गरतांग गली को पुर्नजीवित करने के लिये सरकार से कार्य व धन आदि की स्वीकृति दिवंगत विधायक के ही अथक प्रयासों से हुई। इन लोगों का यह भी मानना है कि पूर्व डीएम डॉ. आशीष चौहान को भी गरतांग गली के लिये बधाई मिलनी चाहिए जिनके दिशा निर्देशन में यह गली आज पर्यटकों के पहुंच के लिये बनी है।

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