उत्तरकाशी : गंगा विश्व धरोहर विषय पर ऋषिराम शिक्षण संस्थान में मंथन 

 

  • संतोष साह

 

ऋषिराम शिक्षण संस्थान में गंगा विश्व धरोहर विषय पर छात्रों के संवाद कार्यक्रम में गंगा विश्व धरोहर मंच संयोजक डाॅ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने छात्रों को गंगा जल की गुणवत्ता व जैव विविधता पर जानकारी प्रदान की औऱ कहा कि गंगा घाटी विस्तृत दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों का वास स्थल है। नदीय संसाधनो के जल स्तर में कमी, प्रदूषण और अत्यधिक दोहन के कारण गंगा घाटी के अनेक जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है। यह भी चिंता का विषय है कि गंगा तटों पर घांताकीय जनसंख्या वृद्धि के साथ देश के अन्य भागों की ही तरह प्लास्टिक की थैलियों व अन्य सामग्री का भागीरथी के अपवाह क्षेत्र में भी अत्यधिक प्रयोग हो रहा है जो इस क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरण के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। संस्थान के प्रबंधक अरविंद जगूड़ी ने भी कहा कि पूरे विश्व के लोगों के साँस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में गंगा नदी अद्वितीय स्थान रखती है। गंगा की धारा अपने प्रवाहमार्ग से विभिन्न जड़ी-बूटियों, खनिज लवणों के अद्भुत गुण लेकर चलती है, जो उसके जल में विलय होकर उसे विलक्षण क्षमता प्रदान करते हैं। प्रधानाचार्य मोजेश मोहंती ने भी पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक छात्र का परम कर्तव्य बताया व कहा कि पर्यावरण के संरक्षण से हम पृथ्वी के वातावरण में संतुलन के साथ प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण पा सकते है। शिक्षक विश्वजीत सेमवाल ने कहा कि कई स्थानों पर शहरों से निकलने वाला सीवर आज भी प्रत्यक्ष रूप से गंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है जबकि भारतीयों की आस्था का प्रतीक है व जीवित व्यक्ति के दर्जे से अलंकृत उस देवनदी गंगा की ऐसी दुर्दशा हमारे सभ्य समाज को शोभा नहीं देती। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक विजयानंद जोशी, बद्रीश बिष्ट, महाजन सिंह चौहान, जगदम्बा प्रसाद बहुगुणा, गुरु प्रसाद उनियाल, बीना थपलियाल, स्वाति डंग समेत अन्य उपस्थित रहे।