उत्तरकाशी : गंगा विश्व धरोहर घोषित हो,गंगोत्री से मिशन की शुरूआत

 

  • संतोष साह

 

 

गंगोत्री धाम में गंगा विश्व धरोहर घोषित हो के संकल्प लेने के साथ हिमालय की जैव विविधता एवं राष्ट्रीय नदी गंगा की सहायक धराओं के संरक्षण मिशन की शुरुआत की गई। गंगोत्री धाम में गंगा व गंगा की सहायक जल धाराओ के साथ-साथ हिमालय की जैव विविधता के संरक्षण के लिए गंगा विश्व विरासत घोषित हो इसका संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि वैश्विक अमूल्य धरोहर व निर्मल पावन जल की स्रोत व करोड़ों लोगों की आस्था की प्रतीक जीवनदायिनी मां गंगा भारतीय संस्कृति की ध्वज वाहक है। इसलिए गंगा दुनिया की सिर्फ सबसे पवित्र नदी ही नही बल्कि असंख्य दुर्लभ जलीय जीव-जंतुओं के लिए आश्रय भी है। हिमालय की चोटियों से निकली गंगा नदी के किनारों पर हजारों सालों से कई सभ्यताओं ने जन्म लिया है लेकिन शहरीकरण व आबादी बढ़ने से गंगा नदी पर बुरा प्रभाव पड़ा है नदी के कई हिस्से बेहद प्रदूषित हो चुके है यानि नदी के किनारे बसे शहरों का कचरा, जल-मल व जहरीला पानी गंगा को प्रदूषित कर रहा है। रासायनों एवं कीटनाशकों का नदी में पहुंचनें से गंगा जल जहरीला बनता जा रहा है। गंगा संरक्षण का अभिप्राय हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक सम्पूर्ण जैवविविधता संरक्षण जरूरी है, इसके अलावा जलवायु, जमीन, खेती, हरियाली जीव- जन्तुओं और वनस्पतियां वे सब कुछ जो इस क्षेत्र को बचाए रखने के लिए जरूरी है। इससे व्यवसायी, किसान आदि जिनका जीना-मरना गंगा के साथ है, वे अपनी जीविका के लिए गंगा पर आश्रित हैं उनका जीवन व अनुभव भी सुरक्षित रह सकेगा। रावल व गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश सेमवाल ने कहा कि गंगा की की स्वच्छता निर्मलता के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि गंगा जल की पवित्रता उसमें मौजूद विलक्षण क्षमता के कारण है इसलिए इसे जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया गया था और अब गंगा के नैसर्गिक संरक्षण हेतु इसे विश्व धरोहर में शामिल किये जाने हेतु समर्थन करते हैं। ईश्यावाश्यम आश्रम गंगोत्री धाम के परमाध्यक्ष स्वामी राममूर्ति महाराज ने कहा कि मैं भाग्यशाली हूँ कि 35 वर्षों से गंगोत्री में गंगा माँ के आँचल में साधना कर रह रहा हूँ। गंगा की महिमा दिव्य व अनंत है। गंगा संरक्षण के लिए जो प्रयास किये जा रहे हैं सराहनीय है लेकिन वे अपर्याप्त हैं अच्छा रहेगा कि गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक नित्य गंगा जल का वैज्ञानिक परीक्षण कराकर प्रदूषण के कारणों का पता लगाकर उस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

डाॅ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने कहा कि इस मिशन के द्वारा जल साक्षरता के माध्यम से नदियों के तटों पर रहने वाले लोगों व स्कूल तथा कालेजों में अध्ययनरत छात्रों को रचनात्मक व्यावहारिक जानकारियों व प्रदर्शनियो के द्वारा सचेत करके गंगा को निर्मल व स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण हेतु अपील की जायेगी। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित सहित ज्ञानचंद पंवार, सुदीप सिंह रावत, राजेश सेमवाल, सुनील सेमवाल, जगरोशन सिंह आदि मौजूद थे।

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