उत्तरकाशी : गढ़वाली बोली में रामलीला की चौथी कार्यशाला का समापन साधना कुटीर मांडों में हुआ,कार्यशाला सहयोग व मार्गदर्शन वास्ते मानस प्रेमी का समिति ने जताया आभार

  • संतोष साह

उत्तरकाशी में श्री आदर्श रामलीला समिति का प्रयास जारी है अपनी गढ़वाली भाषा को लीला के मंचन में लाने का। इसके लिए समिति कार्यशाला के जरिये तैयारी कर रही है। समिति के संयोजक,पदाधिकारी, पात्र और वादकों का कार्यशाला में रामायण के ग्रंथ का गढ़वाली भाषा मे लिखित से लेकर से लेकर बोली में भी रिहर्सल हो रहा है।

समिति द्वारा इससे पूर्व तीन स्थानों में कार्यशाला आयोजित की जा चुकी थी। रविवार को समापन हुई कार्यशाला का यह चौथा चरण था। मांडों कि भराड़ी देवी साधना कुटीर में आयोजित हुई चौथी कार्यशाला के लिये सहयोग व मार्गदर्शन रामलीला समिति को शांति प्रसाद शास्त्री मानस प्रेमी का मिला। जिस पर समिति ने उनका आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के समापन पर साधना कुटीर में कोरोना से कालकलवित हुए लोगों की मृत आत्मा की शांति के लिये दो मिनट का मौन रख श्रदांजलि दी गई।
इससे पूर्व तीन दिन तक चली कार्यशाला में पहुंचे विशिष्ट अतिथियों ने गढ़वाली भाषा मे रामलीला की कार्यशाला करने और भविष्य में इसके मंचन को लेकर समिति के प्रयासों की सराहना की। इनमें प्रमुख रूप से शांति प्रसाद भट्ट मानस प्रेमी, डॉ. उमा शंकर बलूनी सेवानिवृत्त आयुष अधिकारी, जगन्नाथ प्रसाद भट्ट,हरि प्रसाद भट्ट सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, अनुज ब्रह्मचारी कमला कुटीर लक्षेश्वर,माधव प्रसाद जोशी शिक्षक, प्रताप रावत,स्यालिक राम भट्ट,नरेश चौहान समेत अन्य शामिल रहे।
उधर कार्यशाला में जिन लोगों की उपस्थिति रही उनमें समिति के अध्यक्ष गजेंद्र मटूड़ा,मुख्य उदघोषक जयेंद्र पंवार,प्रबंधक भूपेश कुड़ियाल,राधा बल्लभ,प्रताप सिंह रावत,कमल सिंह रावत,विक्रम शाह, दिनेश नौटियाल, कैलाश सेमवाल,माधव नौटियाल, नरेंद्र चौहान, अरविंद राणा,रमेश चौहान,शांति भट्ट समेत अन्य हैं। कार्यशाला का संचालन जयेंद्र पंवार ने किया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का पांचवां चरण भंकोली(अस्सी गंगा घाटी) में होगा। इसके अलावा उन्होंने गढ़वाली भाषा कार्यशाला सम्पन्न होने के उपरांत गढ़वाली भाषा में रामलीला की पुस्तक प्रकाशन करने और उसका विमोचन अगले वर्ष मकर संक्रांति के दिन कराने की भी बात कही।

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