धू धू कर जल उठी लंका , रामलीला मंचन का शुभारंभ पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद चौहान ने दीप प्रज्वलित कर किया

विशाल भटनागर /सनसनी सुराग न्यूज

कैराना। कस्बे के गौशाला भवन रामलीला मंचन के 13 वे दिन हनुमान जी लंका को आप के हवाले कर देते हैं
मंगलवार को लीला के मंचन मे रामचंद्र जी के आदेश पर हनुमान जी समुंदर पार कर कर लंका में पहुंच जाते हैं जहां पर सबसे पहले उन्हें एक कुटिया में राम नाम का जाप कर रहे विभीषण मिलता है जिससे मुलाकात करने पर दोनों एक दूसरे को अपने परिचय देते हैं जिस पर हनुमान जी बताते हैं कि मैं रामचंद्र जी का भक्त हनुमान हूं और सीता जी की खोज में लंका आया हूं तो वहीं दूसरी ओर विभीषण बताता है कि में लंका के महाराजा रावण का भाई हूं और लंका में इस प्रकार रह रहा हूं जैसे दांतो के बीच में जीभ रहती है और हनुमान जी उससे सीता को कहां पर ले जाकर रखा गया है यह जानकारी लेते हुए बताया जाता है कि भगवान राम की धर्मपत्नी सीता जी को अपनी अशोक वाटिका में लंकिनी नामक राक्षसी की सुरक्षा में छुपा कर रख रखा है तभी हनुमान जी अशोक वाटिका में पहुंच जाते हैं इसी दौरान वहां पर रावण पहुंच जाता है रावण को आता देख हनुमान जी एक पेड़ के पीछे छुप कर बैठ जाते हैं और रावण ओर सीता के मध्य हुई वार्ता को सुनते हैं l रावण सीता जी को समझाने का हर संभव प्रयास करता है कि मेरे रनवास में चलकर जिंदगी का लुत्फ था परंतु सीता जी नहीं मानती हैं इसे क्रोधित रावण उस पर तलवार उठाता है तो रावण के साथ पहुंची उनकी पत्नी मंदोदरी उनका हाथ पकड़ कर कहती है कि लंका के राजा और स्त्री पर हाथ उठाते हो यह बड़े ही शर्म की बात है और रावण को रोकती है l जिससे रावण अपनी तलवार रोक लेता है और सीता जी को सोचने के लिए समय दे देता है और वहां से चला जाता है जब रावण वहां से जाता है तो सीता जी के सामने हनुमान जी पहुंचते हैं और उन्हें सारा वृतांत बताते हैं और रामचंद्र जी के द्वारा दी गई निशानी के तौर पर अंगूठी उन्हें दिखाते हैं ।

 

इस पर सीता जी हनुमान जी से राम लक्ष्मण की कुशलता पूछती है और उनसे कहती है कि आप प्रभु को यह संदेश भेज देना कि जल्द मुझे कैद से मुक्ति दिलाएं इसी दौरान हनुमान जी को भूख लग जाती है तो वह सीता जी की अनुमति लेकर अशोक वाटिका में लगे फलों को खाने लगते हैं और पेड़ पौधे तोड़ देते हैं जब इसकी जानकारी लंका के राजा रावण को लगती है तो वह अपने पुत्र अक्षय कुमार को उस वानर को पकड़ने के लिए भेजता है जब अक्षय कुमार उसे पकड़ने जाता है तो हनुमान जी उसका वध कर देते हैं अक्षय कुमार की मृत्यु की सूचना पर क्रोधित रावण अपने पुत्र मेघनाथ को हनुमान जी को पकड़ने के लिए अशोक वाटिका भेजता है तो मेघनाथ ब्रह्मास्त्र चला कर हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में ले आता है जहां पर हनुमान जी रावण को काफी समझाने का प्रयास करते हैं परंतु रावण नहीं मानता है तो रावण अपने दरबारियों को आदेश देता है कि इसे तलवार से फौरन मार दो तभी विभीषण जी रावण को ऐसा करने पर इनकार करते हैं कि दूत को मारना नीति के विरुद्ध है तो रावण अपने सेनापतियों को आदेश देता है कि इसकी पूंछ में आग लगा दो और इसे छोड़ दो तो सेनापति हनुमान जी की पूंछ में आग लगने के बाद छोड़ देते हैं l जिसके उपरांत हनुमान जी रावण की पूरी लंका जला देते हैं और सीता जी से मिलकर निशानी के तौर पर उनकी चूड़ामणि लेकर समुंदर पार करते हुए रामा दल में पहुंच जाते हैं और सारा वृतांत भगवान राम को बताते हैं जिस पर प्रसन्न होकर भगवान राम हनुमान जी से कहते हैं कि हनुमान जी तुम मेरे सच्चे प्रिय हो तुम जो मुझसे आज मांगोगे मैं तुम्हें वही दूंगा तो हनुमान जी रामचंद्र जी से उनकी भक्ति मांग लेते हैं और वानर सेना को समुंदर पार कर रावण से युद्ध करने की तैयारी के लिए कहते हैं l राम का अभिनय सतीश प्रजापत लक्ष्मण का अभिनय राकेश प्रजापत सीता का अभिनय शिवम गोयल हनुमान जी का आशु गर्ग रावण का अभिनय शगुन मित्तल विभीषण का अमन गोयल अंगद का वासु मित्तल जामवंत का रोहित नामदेव अक्षय कुमार का सोनू कश्यप साकी का हर्ष बंसल मेघनाथ का आशीष नामदेव नल का देव गर्ग निल का सौरभ कश्यप सुग्रीव का रिषभ कुच्छल ने किया l रावण के दरबार में सन्नी धीरू ओर सागर मित्तल ने बहुत सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया l दर्शको की भारी भीड़ रही, उधर कार्यक्रम के शुभारंभ पर पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद चौहान द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया इस दौरान दर्जनभर पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

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