दशरथ मरण भरत संवाद की सुंदर लीला का मंचन

तनुज कुमार
कांधला /शामली
बीते शुक्रवार को श्रीरामलीला कमैटी पंजाबी धर्मशाला कांधला के तत्वधान में भगवान श्री गणेश व राम लक्षमण की आरती के पश्चात लीला मंचन कार्यक्रम किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के 14 वर्ष वनवास जाने के बाद जब सुमंत अकेले अयोध्या वापस लौटे और राजा दशरथ को राम के वन जाने का समाचार सुनाया। जिसे सुनकर दशरथ शोक में डूब गए और विलाप करने लगे। पुत्र वियोग में विलाप करते करते राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। दशरथ मरण के गुरु वशिष्ठ द्वारा संदेश भेजे जाने पर भरत शत्रुघन साथ अपनी ननिहाल से अयोध्या पहुंचे। जहां अपनी माता कैकेयी से अयोध्या का हाल पूछा तो कैकेयी ने कहा कि कछुक काज विधि बीच बिगारेऊ, भूपति सुरपुरि को पग धारयो। इतना सुनते ही भरत ने अपनी माता कैकेयी को भला बुरा कहा कि माता तूमने यह अच्छा नहीं किया।

 

 

अपने भाई मर्यादा पुरुषोत्तम राम को लौटाकर गद्दी पर बिठाऊंगा। इसके बाद भरत शत्रुघन अपने पिता का दाह संस्कार करके चित्रकूट पहुंचे और अपने भाई से वापस अयोध्या लौटने की अपील की। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपनी चरण पादुका देकर 14 वर्ष पूरे होने के बाद अयोध्या वापस लौटने की बात की। इस दौरान राम हरिवल्लभ, सीता भोला रावत , लक्ष्मण तन्मय तथा सुमन्त रंजन शर्मा, कौशल्या नवीन, कैकई चितरंजन शर्मा, भरत प्रवीण के किरदार में सुन्दर अभिनय प्रस्तुत किया। दूसरी ओर श्री रामलीला कमेटी मंडप पंचवटी के तत्वधान में बनवास लीला का मंचन स्थानीय कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत किया गया। बनवास लीला में कैकई दशरथ संवाद, श्री राम को वनवास की मार्मिक लीला का मंचन किया गया। इस दौरान मेहर चंद सिघल, राम कुमार सिंघल, जॉनी शर्मा, सर्वेश वर्मा, श्याम कुमार सिंघल आदि लोग उपस्थित रहे।

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