उत्तरकाशी : कोविड -19 की व्यवस्था गले नहीं उतर रही,कोरोना पॉजिटिव भी आश्चर्य में

  • संतोष साह

कोरोना काल मे कोरोना संक्रमण और उसके लिये एतिहातन कदम जनता के गले नहीं उतर रहे हैं। सोशल डिस्टेन्स और मास्क के प्रयोग के छोड़कर जो व्यवस्था का आलम है वह एक तो पब्लिक के गले नहीं उतर रहा है तो वहीं कोरोना पॉजिटिव के पॉजिटिव आने और एक हफ्ते से भी कम समय मे बगैर किसी दवा,ट्रीटमेंट के ठीक हो जाने और उसे घर चले जाने की सलाह भी समझ से परे लग रही है। पब्लिक के बीच यह भी चर्चा है कि विभिन्न कोविड केअर सेंटर में कोरोना पॉजिटिव को रखे जाने और उसे बगैर किसी जांच और कागज पकड़ाए ठीक हो जाने कहकर घर चले जाने की बात भी कहीं से हजम नही होती।

सूत्रों से एक जानकारी जो मिली है वह बताती है कि कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उसके ठीक हो जाने के बीच जो मामला हुआ उसके मुताबिक एक कोविड केअर सेन्टर में कुछ सेना के जवान जो कि कोरोना पॉजिटिव आये थे करीब एक हफ्ता क्वारन्टीन में रहे। एक हफ्ते के बाद इनसे बोला गया कि वे ठीक हो चुके हैं और जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ठीक होने की किसी रिपोर्ट,कागज पत्तर के सेना के जवान को कोरोना मुक्त कर दिए जाने पर सेना के जवान कोविड केअर सेंटर से हिले नही जब तक कि उन्हें सेन्टर से छोड़े जाने का कोई प्रमाण नही मिला।

बताया जा रहा कि सेन्टर के इंचार्ज द्वारा यह सूचना स्वास्थ्य विभाग को दिए जाने के उपरांत जब उन्हें डिस्चार्ज करने का कगाज मिला तब सेना के जवान निकले। स्वास्थ्य महकमे ने यह भी नही जाना कि सेना की ड्यूटी में जाने वाले को कहीं रोक दिया जाय तो उसे अपने मातहतों को तो लिखित तौर पर बताना तो पड़ेगा।

उधर अधिकांश कोरोना पॉजिटिव जो कि ठीक होकर बाहर निकल चुके हैं कोरोना के नाम पर क्या इलाज और क्या लाइलाज हो रहा है उसे खुलकर प्रचारित भी कर रहे हैं। कोरोना के नाम पर इनका कहना है कि यदि किसी को बुखार है तो एक पैरासिटामोल की टेबलेट के अलावा दो टेबलेट विटामिन सी के अलावा सुबह नाश्ता और दो टाइम खाने से कोरोना का इलाज 5 से 6 दिन में ठीक हो जा रहा है और उसके बाद कोरोना को घर के लिये छुट्टी मिल जा रही है। इस दौरान न कोई चेकअप और न ही कोई कागज पत्तर उसके ठीक हो जाने का पकड़ाया जा रहा है। इधर इस बावत जब जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी बी.पी.जोशी से जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था चिकिसकों को सौंपी गई है। वही बताएंगे। लेकिन जब उनसे यह पूछा कि स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी होने के नाते आप बेहतर बता सकते हैं के जवाब में उन्होंने कहा कि जो भी कदम उठाए जा रहे हैं वह गाइड लाइन के तहत उठाये जा रहे हैं।

उधर उत्तरकाशी जिले में आवाजाही में जो कदम उठाए जा रहे हैं उसको लेकर भी जनता खुश नहीं है। जिन लोगों को कार्य के वास्ते जिले से बाहर निकलना है और लौटना है वह भी निकलने से कतरा रहे हैं। क्वारन्टीन और जांच की लंबी लाइन में लगने को लेकर। वहीं जो जिले से बाहर हैं और जिले में आना चाहते हैं वे भी क्वारन्टीन किये जाने की वजह से आने को नही तक रहे हैं। यह और कोई नही बल्कि जनता कह रही है कि जब प्रदेश के अन्य जिलों में आवाजाही में कहीं भी इस तरह रोक नहीं तो उत्तर काशी जिले में क्यों ?

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