राजधानी में कोविड-19 की व्यवस्था का आलम,18 बार फ़ोन करने पर 3 घंटे लगे एम्बुलेंस को आने में

  • संतोष साह

प्रदेश की राजधानी में कोविड -19 की व्यवस्था का आलम बुरा है। कोविड पेशेंट को कोविड केअर सेंटर में पहुंचाने के लिये 18 बार फ़ोन करने के बाद जब 3 घंटे में एम्बुलेंस पहुंचेगी तो इससे पता चलता है कि व्यवस्था का आलम क्या होगा। गौरतलब है यह मामला किसी गली,बाजार,मोहल्ला का नही बल्कि शहर के एमएलए ट्रांजिट होस्टल का है जहाँ से एक कोविड पेशेंट को कोविड केअर सेंटर में पहुंचाने के लिये एम्बुलेंस को आने में 3 घंटे लग गए जो राजधानी की कोविड को लेकर व्यवस्थाओं की पोल खोलती है।

गौरतलब है कि एमएलए ट्रांजिट होस्टल से एक युवक कोरोना रिपोर्ट में पॉजिटिव निकलता है। कोरोना पॉजिटिव आने पर युवक के पिता द्वारा होस्टल के फ़ोन द्वारा एम्बुलेंस भेजे जाने को सेंटर में फ़ोन किया जाता है साथ ही जवाब मिलता है कि कुछ ही देर में एम्बुलेंस भेज रहे हैं। यह फ़ोन ठीक 12 बजकर 20 मिनट में किया जाता है। इधर जब एम्बुलेंस नही पहुंची तो उसके बाद युवक के पिता ने ठीक एक बजे एम्बुलेंस भेजने के लिये काल की,बताया गया कि एम्बुलेंस व्यस्त है कुछ समय बाद पहुंचेगी। फिर 1 बजकर 52 मिनट में फ़ोन किया तो जवाब मिला कि एम्बुलेंस फ्री हो जाएगी तो भेज दी जाएगी।

इधर जब एम्बुलेंस सेंटर व 108 को फ़ोन करने पर यही जवाब मिले तो फिर 2 बजे कोविड इंचार्ज डॉ. राजीव दीक्षित को फ़ोन किया गया तो उन्होंने सीएमओ ऑफिस का नंबर देकर वहां बात करने को कहा। 2 बजकर 42 मिनट में जब सीएमओ अनूप डिमरी से बात की तो उन्होंने डॉ. संजय दत्त का नंबर दिया। डॉ. दत्त से जब बात की तो उन्होंने डॉ. दिनेश चौहान सर्विलांस कोविड ऑफिसर का नंबर दिया। अंततः जब एम्बुलेंस नही पहुंची तो 3 बजकर 20 मिनट में पुनः सीएमओ आफिस फ़ोन किया। फिर जाकर कहीं 3 बजकर 35 मिनट में अम्बुलेंस्र पहुंची जो कोविड पेशेंट को महाराणा प्रताप कॉलेज कोविड केअर सेंटर ले गई। जहां की स्थिति भी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है। एक ही कमरे 15 से 20 कोरोना साथ रखे गए हैं। सेपरेट बाथ,टायलेट का कोई मतलब ही नही बनता।
बहरहाल जब एमएलए हॉस्टल में अम्बुलेंस्र पहुंचने में ये स्थिति है तो अन्य तो भगवान भरोसे ही होगी।

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