उत्तरकाशी : उत्तरकाशी के धनारी और गमरी पट्टी के बीच बेडयाथ में भी होता है बटर फेस्टिवल

  • संतोष साह

नेर,थुनेर,बांज,बुरांस के घने जंगलों के बीचों बीच
धनारी व गमरी पट्टी से लगभग 12 किमी की दूरी पर स्थित ‘है ड्यथाथ यहाँ भी हर साल स्थानीय लोगों द्वारा बटर फेस्टिवल मनाया जाता है। डुण्डा,चिन्यालीसौड़
अंतर्गत धनारी,गमरी पट्टी के दूर दराज गांवो के पशुपालक व आमजन यहाँ बेड्याथात देव स्थल में पहुंचते हैं जहाँ स्थानीय लोग अपने ईस्ट भगवान नागराजा ,होंण देव को दूध,दही,घी,मक्खन खीर का भोग चढ़ाते हैं तदोपरांत देवताओं के
पश्वाओं द्वारा दही मक्खन की होली खेली जाती है। जिसमे स्थानीय लोग भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता खुशपाल राणा ने बताया कि भाद्रपद मास की घृत संक्रांति के दिन बेड्याथात मे बटर फेस्टिवल
बडे धूमधाम से मनाया जाता है ।बटर फेस्टिवल के दौरान डांडा, छानियों व गांवो से ग्रामीण अपने घर गांव क्षेत्र की खुशहाली,सुख,समृद्धि ,
हेतु अपने ईष्टदेवताओं
के आशीर्वाद लेने बेड्याथात पहुंच कर मन्नतें भी
मांगते है। उन्होंने बताया कि उक्त स्थल भगवान श्रीकृष्ण तथा पांडवो की तपोस्थली भी मानी जाती है। बताते हैं कि पांडव अग्यांतवास के समय बिचरण करते -करते बेड्याथात मे ठहरे थे। इस स्थल पर भगवान नागराजा ,होणदेव के पौराणिक मंदिर भी है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भी बेहद खूबसूरत है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से यहाँ पर्यटन की बेहतर सभावना बन सकती है। श्री राणा ने यह भी बताया कि बेड्याथाथ से थोड़ी दूरी पर ओखलगढ तोक है जहां आज भी पांडवों के निर्मित शष्त्र औजार व उपकरण पत्थरों
के स्वरूप मे देखे जा सकते हैं।

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