उत्तरकाशी : पारंपरिक बीज उत्पादन कराने में फेल उद्यान विभाग अभी भी पाइजन उपचारित बीज के भरोसे

  • संतोष साह

पी के वाई यानि पारंपरिक खेती योजना को बढ़ावा देने में जिले का उद्यान विभाग पिछले दो सालों में क्या तरक़्क़ी कर पाया और किसानों को पारंपरिक खेती में पारंपरिक बीज का प्रयोग करने में कहाँ तक किसानों को लाभ पहुंचा पाया यह उद्यान विभाग द्वारा मंगाए बीजो से पता चलता है।

पारंपरिक खेती योजना में जो कार्ययोजना बनी है उसमें किसानों को पारंपरिक खेती के साथ पारंपरिक बीजो को भी संरक्षित करने के लिये समय-समय पर किसानों,बागवानों व शाक सब्जी उत्पादकों को बीज भी एकत्र कर रखने की जानकारी के अलावा बीज के भी भंडारण करने के तरीके बताए जाने थे ताकि इससे पारंपरिक बीज का लाभ किसानों को समय से मिलता साथ ही उन्हें बीज खरीद का इंतजार करने के साथ ही पाइजन ट्रेट बीज नहीं खरीदना पड़ता। मगर ऐसा हो न सका।

इधर बताते चलें कि गत वर्ष उद्यान विभाग ने जिले के लिये करीब 150 कुंतल फ्रेंच बीन का बीज मंगाया। इस फ्रेंच बीन के बीज किसानों के खरीदे जाने के बाद फ्रेंच बीन का पारंपरिक बीज इस साल कितना बना यह पता नही अलबत्ता इस साल फिर से फ्रेंच बीन का करीब 100 कुंतल से अधिक बीज मंगाया गया।
उधर मटर के बीज के भी कमोवेश यही हाल है। मिली जानकारी के अनुसार इस बार जो मटर का बीज वह जैविक के बजाय पाइजन से ट्रीटेड है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 136 कुंतल मटर का बीज उद्यान विभाग द्वारा मंगाया गया है। इटावा उत्तर प्रदेश में तैयार यह बीज वाया हल्द्वानी की किसी कृषि फर्म के द्वारा मंगाया गया है।

गौरतलब है कि अभी दो तीन दिन पूर्व ही यहाँ से स्थानांतरित हुए पूर्व मुख्य उद्यान अधिकारी प्रभाकर सिंह से जब मटर के बीज के पॉइज़नड ट्रीटेड होने की जानकारी ली तो उन्होंने पॉइज़नड ट्रीटेड होने से इंकार किया था तो वही पारंपरिक खेती योजना के तहत पारंपरिक बीज जमा होने की जानकारी ली तो उस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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