अंगद का लंकापति के दरबार में युद्ध का ऐलान

 

विशाल भटनागर

कैराना । नगर के गौशाला भवन में श्री रामलीला के मंचन में 14 वे दिन सीएचसी कैराना के प्रभारी डॉ विजेंद्र सिंह ,कैराना के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉक्टर सपन गर्ग, नितिन गर्ग और डॉ दीपक अग्रवाल द्वारा भगवान गणपति के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। रामलीला मंचन में दिखाया गया कि लंकापति रावण अपनी सेना और अपने भाई विभीषण व पुत्र मेघनाथ के साथ अपने दरबार में बैठे , अपनी बड़ाई कर रहा होता है जब उसे इस बात का पता लगता है कि हनुमान जी ने उसकी पूरी लंका जला दी है तो वह अपने दरबारियों को आदेश करता है कि शीघ्र ही युद्ध होने की संभावना है तो उसके दरबारी कहते हैं कि हम वानर सेना को अपना आहार समझकर खा जाएंगे जिस पर विभीषण और रावण का पुत्र प्राप्त प्रहसत रावण को समझाते हैं कि खर दुःखन ओर अक्षय कुमार को मारने वाला कोई साधारण मानव नहीं हो सकता निश्चित ही नारायण का अवतार है और नारायण से बैर करना बिल्कुल गलत है जिस पर क्रोधित रावण अपने भाई विभीषण को लात मारकर उसे दरबार से भगा देता है जिस पर विभीषण जाते-जाते रावण को कहकर जाता है कि तूने मेरा भरी सभा में अपमान किया है याद रखना तेरा अंतिम समय आ चुका है और सीधा रामचंद्र जी की शरण में विभीषण पहुंच जाता है और उन्हें सारा वृत्तांत बताता है जिस पर रामचंद्र जी विभीषण जी को लंका के अगले राजा का राजतिलक करते हैं वहीं दूसरी ओर प्रहस्त भी रावण को काफी समझाने का प्रयास करता है जिस पर रावण उसको भी दरबार से भगा देता है वहीं दूसरी ओर रामा दल के योद्धा नल और नील अपनी शिल्पकारी से समुद्र पर पुल बांध देते हैं l जिसके बाद रामचंद्र जी और पूरी वानर सेना समुद्र पार करते हैं और लंका पहुँच जाते हैं जहां पर समुद्र पार करने के उपरांत भगवान राम पूजा अर्चना के लिए शिवलिंग की स्थापना करते हैं जिसमें पूजन के लिए लंका का राजा रावण को बतौर पंडित आमंत्रित किया जाता है भगवान राम उस शिवलिंग का नाम रामेश्वरम धाम के नाम से रखते है उसके उपरांत रामा दल में भगवान रामचंद्र जी महाराजा सुग्रीव को कहते हैं कि युद्ध प्रारंभ करो और युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व नीति के अनुसार किसी बलशाली योद्धा को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजो ताकि रावण समझ जाए और युद्ध की जरूरत ना पड़े तो सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाता है कि अंगद ही एक ऐसा बलशाली है जो रावण को समझा सकता है जिस पर अंगद रावण के दरबार में पहुंच जाता है और रावण से विनती करता है कि आप दांतो तले तिनका दबाकर भगवान राम की शरण में चले जाओ और जानकी को वापस लौटा दो जिस पर रावण नहीं मानता है और अपने अहंकार का बखान करता है कि मेरे योद्धा तुम्हारी पूरी सेना को मार डालेंगे जिस पर रावण के दरबार में अंगद क्रोधित हो जाता है और एलान कर देता है कि मैं तेरे दरबार में अपनी ताकत का एहसास कराता हूं मैं भरी सभा मे अपना पैर जमाता हूँ यदि तेरा कोई योद्धा मेरे पैर को हिला देगा तो अंगद कसम खाता है कि जानकी जी को हरा देगा जिस पर रावण अपनी सेना और मेघनाथ को आदेश करते हैं कि इसका गुरुर इसके सिर से उतार दो और इसका पैर पटक कर यहीं मार दो लेकिन रावण का कोई भी योद्धा अंगद का पैर नहीं हिला पाता है ।

 

जिस पर अंत में स्वयं रावण अंगद का पैर हिलाने के लिए खड़ा होता है तो अंगद उसे कहता है कि यदि पैर छूने है तो भगवान श्री राम के पैर छू मेरे पैर छूने से तेरा उद्धार नहीं होगा और भरे दरबार में अंगद रावण को युद्ध का ऐलान करके सीधा रामा दल में चला जाता है और सारा वृत्तांत बताता है जिस पर युद्ध की तैयारियां प्रारंभ हो जाती है राम का अभिनय सतीश प्रजापत लक्ष्मण का अभिनय राकेश प्रजापत रावण का अभिनय शगुन मित्तल सीता का अभिनय शिवम गोयल अंगद का अभिनय विकास वर्मा उर्फ विक्की हनुमान जी का अभिनय आशु गर्ग विभीषण का अभिनय अमन गोयल परस्त का अभिनय सोनू कश्यप मेघनाथ का अभिनय आशीष नामदेव दरबारी का अभिनय सुशील सिंघल संजीव वर्मा राकेश सप्रेटा अरविंद मित्तल सागर मित्तल धीरू काका सनी योगेश हर्ष बंसल वासु मित्तल लोकेश रामनिवास वीरेंद्र आदि ने किया कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में पहुंचे सम्मानित पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया वही लीला का मंचन देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से मोहन लाल आर्य डॉ राम कुमार गुप्ता अतुल गर्ग राजेश नामदेव विजय नारायण तायल अभिषेक गोयल विकास संजीव आदित्य मोनू रुहेला आदि मौजूद रहे।

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