उत्तरकाशी : भगवान शिव संपूर्ण ब्रह्मांड में लिंग रूप में समाए हैं : आचार्य दुर्गेश

 

  • संतोष साह

 

भगवान श्री हरि महाराज के पावन सानिध्य में श्री शिव महापुराण कथा में राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेश आचार्य महाराज जी ने कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड लिंग स्वरूप है और उस लिंग स्वरूप में भगवान शिव समाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड में भगवान शिव लिंग रूप में है और लिंग में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है! वैज्ञानिकों ने जो कहा है कि पृथ्वी का आकार गेंद या नारंगी की भांति है, नारंगी या गेंद का अर्थ लिंग से है अर्थात पृथ्वी लिंगाकार रूप में है और लिंग ही भगवान शिव का स्वरूप है। उन्होंने बताया कि जब जीव की उत्पत्ति माता के गर्भ में होती है तो वह बिंदु का अर्थ लिंग सै है अर्थात जीवन का सार भी लिंग ही है, जब कोई साधक साधना के लिए पद्मासन में बैठता है तो वह स्वरूप भी लिंगाकार ही है। दीपक की लौ भी एक प्रकार से शिवलिंग का ही स्वरूप है और मंदिर, गुरुद्वारा आदि धार्मिक इमारतों का आकार भी लिंग स्वरूप ही है अर्थात संपूर्ण ब्रह्मांड के कण-कण में लिंग समाए हुए हैं।उन्होंने यह भी कहा किउत्तराखंड को देव भूमि कहा जाता है क्योंकि यहां के कंकर- कंकर में भगवान शिव शंकर का का वास है।

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