उत्तरकाशी : माल आबकारी का वाहवाही पुलिस को,लॉक डाउन से लेकर अनलॉक तक नहीं थमा शराब का खेल

  • संतोष साह

हफ्ता, पंद्रह दिन में जिले से खबर मिल जाती है कि पुलिस ने पव्वे,अद्धे औऱ बोतलें पकड़ी हैं। बीते रोज भी पुलिस ने 31अदधे व 122 पव्वों के साथ एक को पकड़ा। इससे पहले भी पुलिस कई दफा माल पकड़ चुकी है। बड़कोट मे महीना दो महीना पूर्व 100 पेटी माल पकडे जाने से यह साफ हो जाता है कि शराब के धंधे में शह और मात का भी खेल चल रहा है।

इसमें कोई शक नही की शराब को दुकान के साथ मोबाइल सेवा से भी जोड़ा गया है वरना इतनी मात्रा में शराब बाहर कैसे निकल रही है। लॉक डाउन में शराब बंद रही मगर शराब की दुकान से लेकर गोदाम बाद में खाली नजर आए। जाहिर है मोबाइल के जरिये माल बिका। अनलॉक में भी यह क्रम नही टूटा औऱ अब भी जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शराब के धंधे में भी एक इलाके से दूसरे इलाके में दुकान से लेकर गुपचुप मोबाइल सेवा में भी प्रतिस्पर्धा चल रही है। बताया जा रहा है कि जो माल पकड़ा जा रहा है उसमे आबकारी के बजाय पुलिस को पीठ थपथपाने का मौका दिया जा रहा है।

इसके पीछे आबकारी के अंदर के ही लंबे समय से एक ही स्थान में जमे सिपहसालार व शराब के धंधे से जुड़े लोग शामिल बताये जा रहे हैं जो कि शराब पकड़वाने का क्रेडिट पुलिस के पाले में डाल रहे है। जिला आबकारी अधिकारी प्रतिमा गुप्ता ने तो साफ कहा कि जिले में उनके विभाग के ही जिम्मेदार एक दो कर्मी जो कि पिछले लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हैं उनकी निष्क्रियता के चलते आबकारी विभाग अवैध शराब पर पुलिस के बजाय खुद पकड़ हासिल नही कर पा रहा है। जिला आबकारी अधिकारी ने कहा कि वे खुद पैदल हैं और उनके पास विभाग से वाहन भी नहीं है।

मुख्यालय से वाहन को लेकर कोई कार्यवाही नही हुई। यह पूछे जाने पर की अन्य विभाग के अधिकारी तो वाहन किराये पर लिये हैं के जवाब में उन्होंने कहा कि वाहन सिर्फ दिन के तय समय के लिये मिल रहा है ऐसे में कभी भी वाहन की जरूरत पड़ने पर दुविधा होगी। उन्होंने बताया कि उनके साथ दो सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। वाहन न होने के अलावा पिछले कई वर्षों से तैनात कर्मियों के द्वारा जिले के उन स्थानों जहां शराब के अवैध कारोबार की संभावना हो सकती है कि जानकारी के सहयोग न मिलने से भी आबकारी विभाग कार्यवाही नही कर पा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि यमुना घाटी में तैनात विभागीय कर्मी द्वारा सहयोग न दिए जाने और कार्यवाही को लेकर उन्होंने एक शिकायती पत्र विभाग के मुख्यालय में भी भेजा है।

इधर जिला आबकारी अधिकारी से असल सवाल यह था कि आख़िर समय -समय पर इतनी भारी मात्रा में शराब सड़क में कैसे पहुंव रही है और आबकारी के बजाय पुलिस कैसे हाथ मार रही है के जवाब में उन्होंने कहा कि शराब की दुकानों की प्रतिस्पर्धा, अधिभार समेत कई ऐसे सवाल है जिससे शराब बाहर निकल और स्टोर कर मोबाइल सर्विस का रूप ले रही है और एक दूसरे की प्रतिस्पर्धा में मुखविर आबकारी के बजाय पुलिस को क्रेडिट दे रहे हैं।

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