उत्तरकाशी : यमुनोत्री विधानसभा, 2022 को लेकर राजनीतिक जमीन की तलाश शुरू

उत्तरकाशी : यमुनोत्री विधानसभा, 2022 को लेकर राजनीतिक जमीन की तलाश शुरू

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  • संतोष साह

उत्तरकाशी जिले की यमुनोत्री विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जहाँ गंगा व यमुना के दोनों भूभाग पड़ते हैं। विषम एरिया की भौगोलिक स्थिति यहाँ कई मायने में राजनीतिक नेताओं के लिये उनके पसीने छुडाने की भी कुवक़त रखती है। यही वजह है कि जिले में यमुनोत्री विधानसभा को चुनाव के दौरान सबसे पेचीदा भी माना जाता है।

2017 में मोदी लहर को छोड़ दें तो यह सीट उत्तराखंड बनने के बाद 2017 से पहले कभी भाजपा के खाते में नहीं आयी। सिर्फ 2017 में मोदी फैक्टर में यमुनोत्री की सीट भाजपा को मिली।
इधर यमुनोत्री विधानसभा के अंदर से एक बार फिर राजनीतिक गलियारों से छनकर खबर आने लगी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2022 के लिये यहां राजनीतिक जमीन तलाशने का काम शुरू हो गया है। कई नेता जमीन तलाशने में लगे हैं इनमे कुछ पूर्व में विशेष ओहदों पर रहे लोग भी शामिल हैं। खासकर भाजपा और कांग्रेस के अंदर भी जमीन तलाशने की हलचल है तो वहीं यह विधानसभा दो बार निर्दलीय के कब्जे में रही लिहाजा एक बार फिर 2022 को लेकर भी निर्दलीय दावेदारी को चर्चाओं में मजबूत पहले से माना जा रहा है इसकी सबसे बड़ी वजह राजनीतिक जमीन पहले से बनी है जिसमे सिर्फ फिर से मरहम लगाया जाना बांकी है। जबकि सिटिंग विधायक को छोड़ दें तो भाजपा और कांग्रेस के अंदर जमीन तलाशने के साथ ही गंगा व यमुना में पकड़ कैसे बनेगी? यह किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं।इसका भी पता जमीन तलाशने वालों को भारी भी लग रहा है। वैसे अब तक यमुनोत्री विधानसभा में दिचली,गमरी इलाका महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। यहाँ के वोट के समीकरण उलटफेर करते रहे हैं। वैसे एक दिचली गमरी ही नहीं, यमुनोत्री विधानसभा में गंगा बेल्ट इस विधानसभा के रिजल्ट देने में हमेशा भारी पडी है इसलिए भी की गंगा वार मतदाताओं की संख्या यमुना वेल्ट से अधिक है।

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