पंचायतो ने 26 साल मे क्या पाया क्या खोया

पंचायतो ने 26 साल मे क्या पाया क्या खोया

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सुरेन्द्र अवस्थी/देहरादून
सनसनी सुराग न्यूज़
आज पंचायती राज को सम्पूर्ण देश मे लागू हुए 25 साल हो गए है। जिस सोच के साथ ये संशोधन लागू किया था आज वे उदेश्य पूरे हुए है। ये विचारणीय प्रश्न है। बापू ने अपनी ये इच्छा स्वन्त्रता से पहले बता दी थी कि पंचायतों को स्वत्यता दी जाए पर जब बापू को लगा कि संविधान सभा मे कांग्रेस के लोग ही इस पर कोई विचार नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने गुस्से मे कहा था कि मुझ से राय लेने आने की कोई आवश्यकता नही है। पर संविधान निर्माता अम्बेडकर इनके पक्ष मे नही थे उनका मानना था कि इससे दलितों का शोषण होगा।
इन सभी चीजों के वावजूद राजस्थान के नागौर से ये शुरुआत हुई। ओर उसके बाद इसमे कर्नाटक और केरल ने पंचयात शाशन को सशक्त बनाने के लिए उपयोगी कार्य किये। जब जनता दल सरकार ने 1977 मे अशोक राय मेहता समिति को इस मामले पर विचार करने के लिए कहा था तो समिति ने साफ साफ शब्दो मे कहा कि नेता और अधिकारी नही चाहते कि कोई तीसरा खंबा भी हो जिसके हाथो मे विकास की बागडोर हो। पर आज स्थिति उन्ही के अनुरूप है आज भी विकास खंड अधिकारी ही ये निश्चित कर रहे है की कितना विकास हो और विकास कार्यो के लिए कितना धन मुहैय्या करवाया जाए।
आज देश का कोई भी राज्य ऐसा नही है। जो कह सके कि हमारे राज्य मे पंचायती राज सुदुर्ड है। पर इस व्यवस्था को अपने स्वर्णिम दौर मे पहुचाने के लिए ये भी आवश्यक है कि इसमें कुछ और बदलाव किए जाए। जैसे कि प्रतिनिधियों के लिए शिक्षा के मानक तय हो। गावो मे पंचायत भवन हो जिसमें बैठके सुचारू रूप से हो सके। क्योंकि यदि कोई प्रतिनिधि गरीब है तो वो पंचायत की बैठक स्वयं के घर पर आयोजित नही कर सकता और उसका शिछित होना भी अति आवश्यक है क्योंकि उस से वो प्रतिनिधि के अधिकारों को जान पायेगा ओर अधिकारीयो के हाथों की कठपुतली नही बनेगा। गांधी जी का ये स्वपन तभी पूर्ण हो पायेगा।

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