उत्तरकाशी: आखिर कब तक लोग ट्रालियों पर अपनी जान के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे, कब तक प्रशासन मौन रहेगा।

उत्तरकाशी: आखिर कब तक लोग ट्रालियों पर अपनी जान के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे, कब तक प्रशासन मौन रहेगा।

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वीरेंद्र सिंह

उत्तरकाशी। एक और प्रदेश सरकार उत्तराखंड की विकास की नई रूपरेखा लिखने की कवायद कर रही है। लेकिन इस कवायद के बीच सरकार की नजर अभी तक सीमांत जनपद उत्तरकाशी की दुश्वारियों को नहीं देख पाई है। आज के तकनीकी युग मे उत्तरकाशी जनपद के लोग ट्रॉलियों के सहारे जीवन जी रहे हैं। बीते रविवार को दूरस्थ मोरी ब्लॉक के मोरा गांव में ट्राली से नदी को पार कर रही युवती की ट्राली से गिरने के कारण मोके पर ही मौत हो गयी। यह इस प्रकार की पहली घटना नहीं है कि इन जर्जर और खस्ताहाल ट्रॉलियों पर लोग अपनी जान गवां चुके हैं। अभी करीब 2 माह पूर्व मोरी के ही सांद्रा गांव में एक किशोरी की ट्राली से गिरने के बाद नदी में बहने से मौत हो गयी थी। इन सब घटनाओं से यह कहना अपवाद नहीं होगा कि पहाड़ के लोग हर मौत का कुआं जैसे खतरनाक खेल खेलते हैं। जहां ऊपर जर्जर ट्राली तो नीचे मुँह खोले उफनती नदियां। यह स्थिति मोरी ही नहीं बल्कि जनपद के कई गांव की है। वर्ष 2012 ओर 13 की आपदा के बाद गंगा यमुना और टोंस सहित जनपद की अन्य नदियों के पुल बह गए थे। लेकिन आज भी पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी लोग ट्रॉलियों पर रोज जान जोखिम में डाल रहे है। जिला मुख्यालय के समीप चामकोट,स्याबा सहित अस्सी गंगा घाटी सहित यमुना नदी पर ठकराल पट्टी और मोरी के कई गांव के लिए अभी भी पुल नहीं बन पाए हैं। लेकिन सब यथा स्थितियों को देखते हुए भी शासन प्रशासन मुवाअजा और झूठी सांत्वना देकर इतिश्री कर देता है। आखिर कब तक लोग ट्रॉलियों पर अपनी जान के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे।

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