बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले……… उत्तरकुंजी विवाद-अध्यापक भर्ती काउंसलिंग निरस्त उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम आदेशों तक भर्ती रोकने का दिया आदेश

बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले……… उत्तरकुंजी विवाद-अध्यापक भर्ती काउंसलिंग निरस्त उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम आदेशों तक भर्ती रोकने का दिया आदेश

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@nazimrana

चौसाना शामली।
बुद्धवार 2जून2020
69000 सहायक शिक्षक भर्ती की कॉउन्सिलिंग को अचानक रोक कर अभ्यर्थियों के जमा कागज़ वापस कर दिए गए।बुद्धवार को भर्ती हेतु कॉन्सिलिंग शामली के कैराना रोड स्थित स्कोटिश इंटरनेशनल स्कूल में बखूबी चल ही रही थी कि अचानक , माननीय हाई कोर्ट बेंच लखनऊ द्वारा , भर्ती प्रकिर्या पर अग्रिम आदेशों तक स्टे लगा दिया गया। इसके बाद जिनकी कॉउन्सिलिंग हो चुकी थी, उन सबके जमा हुए कागज़ वापस कर दिए गए है।अब उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई को होगी।

आपको बतादे की69000 शिक्षक भर्ती करने के लिए सरकार द्वारा एक 6 जनवरी 2019 को एक अध्यापक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया था, जिस समय भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था उस समय सरकार द्वारा परीक्षा पास करने हेतु कोई भी पासिंग मार्क का निर्धारण या ज़िक्र शासनादेश में नहीं किया था। परंतु परीक्षा के अगले ही दिन 7 जनवरी 2019 को सरकार द्वारा सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों हेतु 150 नंबर की परीक्षा में से 65% यानी 97 अंक और पिछड़ी एवं अनुसूचित जाति जनजाति हेतु 60% अर्थात 90 अंक लाने पर ही पास होने का शासनादेश जारी किया।ओर यह पासिंग मार्क निर्धारित कर दिया गया। बस यहीं से भर्ती पर विवाद शुरू हो गया।

विवाद का कारण रहा शिक्षा मित्रों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं लखनऊ में कई मुकदमे दायर किए गए और उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया गया कि सरकार जबरन हमको बाहर करने की प्लानिंग कर रही है व सुनियोजित तरीके से सब करके हाई पासिंग लगा रही है ताकि उम्र के आखिरी पड़ाव के करीब लगे शिक्षा मित्र उसको पास न कर सके, व सरकार उनको बाहर कर दे।जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली के आदेशों पर 137000 पदों पर भर्ती की जानी है और उसमें शिक्षामित्रों को उम्र में छूट व अनुभव के आधार पर उचित भारांक देकर 137000 पदों हेतु दो लगातार भर्तियों में शामिल किया जाए।

उच्चतम न्यायालय के आदेशों की बदौलत ही ढाई अंक प्रति कार्यानुभव वर्ष अधिकतम 25 अंक भारांक दिलाया गया ओर उम्र सीमा समाप्त की गई।ताकि वे निये लड़को संग मेरिट में बन सके।

व कहा गया कि इन्ही नियमो के साथ सरकार द्वारा शिक्षा मित्रों को भारांक व उम्र में छूट देकर भर्ती में प्रतिभाग कराया जाए।
जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 137000 पदों में से पहली बार 68500 पदों पर भर्ती की गई वह उसके लिए कराई गई भर्ती परीक्षा में केवल सामान्य एवं पिछड़ी जातियों के लिए 45% अर्थात 67 अंक वह अनुसूचित जाति एवं जनजाति हेतु 40% प्राप्तांक अर्थात 150 में से 60 अंक निर्धारित किए गए थे, तो अब एक ही भर्ती के सेकंड पार्ट में पासिंग मार्क का बढ़ाना 90 और 97 अर्थात 60% और 65% कर देना शिक्षामित्रों के लिए खतरनाक है व सरकार जानबूझकर शिक्षामित्रों को भर्ती में प्रतिभाग करने से रोक रही है,

इसी पर संज्ञान लेते हुए माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ की सिंगल बेंच द्वारा एक आदेश पारित किया गया कि उक्त भर्ती को भी 40व 45% पासिंग मार्क पर ही संपन्न कर शिक्षामित्रों को उच्चतम न्यायालय के आदेशों के क्रम में दोनों भर्तियों में समान रूप से प्रतिभाग करने हेतु बराबर मौका और बराबर अवसर दिया जाए। परंतु राज्य सरकार द्वारा उक्त आदेश के विपरीत जाकर उच्च न्यायालय की डबल बेंच में अपील दाखिल की गई मुदकमा सालो तक चला व न्यायालय द्वारा सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए डबल बेंच द्वारा सरकार के पक्ष में निर्णय दिया गया।

जिस पर सरकार द्वारा यह भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई एवं भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया।

अब भर्ती पर दूसरा विवाद यहां से शुरू होता है:- भर्ती परीक्षा के परिणाम आते ही कुछ परीक्षार्थियों द्वारा भर्ती परीक्षा में कुछ सवालों के सही जवाब देने के बावजूद भी अंक ना मिलने का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की गई और उन विवादित सवालों पर परीक्षा नियामक प्राधिकरण से नंबर दिलाए जाने का आदेश पारित करने की प्रार्थना की। इधर दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार भर्ती परीक्षा को बड़ी तेजी के साथ संपन्न करती रही व सारी औपचारिकताएं पूरी करते हुए 3 मई को पास हुए अभ्यर्थियों से काउंसलिंग में प्रतिभाग कराया गया उधर विवादित सवालों पर 1 मई को उच्च न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था जो 3 मई को सुबह सुनाया गया एवं उत्तर प्रदेश सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि इन विवादित सवालों के सही जवाब क्या है इन पर अब फैसला यूजीसी का पैनल करेगा और तब तक के लिए अर्थात 12 जुलाई तक के लिए भर्ती प्रतिक्रिया के सभी आयामों को तत्काल स्थगित किया जाता है। *इस भर्ती परीक्षा में विवादों में रहे सवालों में एक सवाल यह भी रहा की नाथ पंथ के प्रवर्तक कौन थे जिसके चार विकल्पों में से एक विकल्प गुरु मत्स्येंद्रनाथ दूसरा विकल्प गुरु गोरखनाथ व दो अन्य विकल्प थे पीएनपी द्वारा गुरु मत्स्येंद्रनाथ को सही माना गया परंतु न्यायालय की शरण में गए अभ्यर्थियों द्वारा काफी मजबूत साक्ष्य जुटाए गए कि नाथ पंथ के प्रवर्तक गुरु गोरखनाथ है इसी प्रकार उक्त भर्ती परीक्षा में एक सवाल यह भी विवादों में रहा कि भारत में गरीबी का आकलन किस आधार पर किया जाता है विकल्प एक परिवार उपभोग व्यय दूसरा विकल्प प्रति व्यक्ति आय दो अन्य, न्यायालय पहुंचे अभ्यर्थियों द्वारा प्रति व्यक्ति आय को सही ठहराने के लिए साक्ष्य जुटाए गए परंतु राज्य सरकार द्वारा परिवार उपभोग व्यय को ही सही ठहराया। इसी प्रकार एक विवादित क्वेश्चन यह भी रहा कि संविधान निर्मात्री सभा के पहले अध्यक्ष कौन थे विकल्प एक सच्चिदानंद सिन्हा विकल्प दो राजेंद्र प्रसाद न्यायालय की शरण में पहुंचे अभ्यर्थियों द्वारा कहां गया कि यह सवाल गलत तरीके से पूछा गया है दोनो ही संविधान निर्मात्री सभा के पहले अध्यक्ष थे एक अस्थाई व एक स्थाई।

सच्चिदानंद सिन्हा अस्थाई अध्यक्ष रहे एवं राजेंद्र प्रसाद स्थाई अध्यक्ष रहे तो प्रथम किसको बताये , दोनो विकल्प सही है। अतः इस पर भी कॉमन नंबर दिया जाए इसी प्रकार कई अन्य सवाल भी विवादित हैं जिन पर सरकार अपने जवाबों के साथ उच्च न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर पाई अतः उच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी दिल्ली के पैनल को यह मामला भेजने के लिए कहा गया है कि वह बताएं कि उक्त सवालों के सही विकल्प क्या है, तब तक के लिए भर्ती को स्थगित किया जाए यदि कुछ सवालों के जवाब,अभ्यर्थियों के पक्ष में साबित होकर, अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ते हैं एवं वे भी इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर पाते हैं तब तक भर्ती संपन्न हो चुकी होगी उस स्थिति में ऐसे अभ्यर्थियों को कैसे नौकरी मिलेगी ये विचारणीय है अतः उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा गतिमान भर्ती प्रक्रिया को अपने अग्रिम आदेश तक 12 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

चौसाना से बीटीसी प्रतिभागी अंशुल कुमार ,नितिन कुमार, संदीप कुमार का कहना है बड़ी मेहनत से इम्तहान पास किया था शिद्दत से भर्ती के इंतज़ार में थे, मगर पीएनपी की गलतियों के कारण सबको खमियाजा भोगगना पड़ा। विवादित सवालों को हटा देना चाहिए था, या कॉमन अंक सबको देदेते।
कॉन्सिलिंग में पहुंचे शिक्षा मित्रों का कहना है हमारे साथ सरकार के आला कर्मचारी हर कदम पर छल कर रहै है। हम आखिरी दम तक लडते रहने का जज़्बा रखते है। भले हमारा आज हमारा रुक गया हो लेकिन जुलाई में ज़रूर होगा ओर उस समय हमारे ओर साथी भी उत्तीर्ण होकर इस चयन में शामिल होंगे इस जिले में कुल 54 शिक्षा मित्र उत्तीर्ण होकर कॉन्सिलिंग हेतु पहुंचे थे।

ए साहिल तेरी खुशी की खातिर, हमने अपनी कश्ती को डुबो डाला।
अधूरी मुस्कान लिए हम शहर में अब जिये भी तो जिये कैसे।।

भर्ती अभ्यर्थी…….

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