उत्तरकाशी : अवस्थापना सुविधाओं को दुरुस्त किये बगैर क्या शीतकालीन यात्रा परवान चढ़ेगी?

उत्तरकाशी : अवस्थापना सुविधाओं को दुरुस्त किये बगैर क्या शीतकालीन यात्रा परवान चढ़ेगी?

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  • संतोष साह

उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ धामों में इस बार उनके शीतकालीन निवास से जो यात्रा की बात हो रही है साथ ही जिसका श्रीगणेश आज गंगा के मायके यानि गंगोत्री गंगा के शीतकालीन निवास मुखवा से हुआ है उसका स्वागत तो हुआ है मगर शीतकाल में क्या यात्रा परवान चढ़ पाएगी कहना मुश्किल है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड प्रदेश बनने के बाद शीतकालीन यात्रा को शुरू कराने के प्रयास पिछले वर्षों में भी सरकारों ने भी किये थे मगर यात्रा परवान नहीं चढ़ पायी। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी, हरीश रावत ने भी शीतकाल की यात्रा को शुरू कराया था। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। दरअसल ग्रीष्म काल की यात्रा समाप्त होने के बाद शीतकाल की यात्रा को लेकर जो सबसे बड़ा सवाल होता है वह अवस्थापना सुविधाओं को लेकर होता है। यहां शीतकाल में भी यात्रा की बात तो हो जाती है लेकिन शीतकाल में यात्रियों के लिये सुविधा व अन्य व्यवस्था को लेकर कहीं जिक्र नहीं होता। ऐसे में जो शीतकाल की यात्रा की बात हुई है वह कोरी न रह जाय।

वैसे तीर्थ धाम की यात्रा की परंपरा ग्रीष्म काल की रही है। इन तीर्थ धामों के शीतकालीन निवास में तीर्थ यात्रियों के आने व दर्शन करने के साथ ही शीतकाल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की जो बात हो रही है लेकिन शीतकाल में यहां तक पहुंचने के लिये यात्रियों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा इस पर भी कोई तैयारी या व्यवस्था बनाये जाने का कहीं जिक्र नही है जबकि ग्रीष्म काल की यात्रा में यात्रा शुरू होने से पहले से लेकर यात्रा के दौरान भी व्यवस्था को लेकर कई मर्तबा बैठकों का दौर चलता है। शीतकाल में देखें तो चारों धामों के नजदीकी इलाकों के लोग घाटी का रुख कर लेते हैं। कई जगह सन्नाटा पसर जाता है। उपरी इलाकों के होटल,ढाबे,आश्रम सभी शीतकाल में बंद हो जाते है। सरकारी सिस्टम से लेकर आपातकालीन सेवाएं भी काफी कुछ सिमट जाती है। गिनी चुनी आबादी नजर आती है। ऐसे में तीर्थ यात्री यदि आते भी हैं तो सुविधाओं के इंतजामात पहले जरूरी होंगे।
उल्लेखनीय रहे कि आज उत्तराखंड चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने गंगोत्री धाम के शीतकालीन निवास मुखवा से शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ किया। उन्होंने अपेक्षा की ,कि शीतकाल में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये यात्री धामों के दर्शन कर सकते हैं।

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