उत्तरकाशी : शहर को नंबर वन बनाना,मगर कसम खाने को राजी नहीं

उत्तरकाशी : शहर को नंबर वन बनाना,मगर कसम खाने को राजी नहीं

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  • संतोष साह

नदी किनारे कूड़ा फैला हो तो नमामि गंगे योजना की याद जरूर ताजा हो जाती है। गंगा को स्वच्छ, निर्मल रखने के लिये नमामि गंगे में क्या कुछ हो रहा है इसको गंगा तट के हालात बता रहे हैं। नमामि गंगे को लेकर केंद्र करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि गंगा का अस्तित्व व उसकी निर्मलता बनी रहे लेकिन यहां गंगा के उद्गम के नजदीकी पहले शहर में ही हालात खराब हैं। गंगा के तटबंधों में जिस हिसाब से कूड़ा बिखरा पड़ा है वह सिस्टम पर ही सवाल खड़े करता है।

ताज्जुब इस बात का भी है कि जब कूड़े को उठाने के लिये सारे दिन माइक बज रहा है और नंबर वन बनाने के लिये संबोधन हो रहा है तो फिर मुख्य सड़कों के नीचे गंगा तट कूड़े के ढेरों से क्यों अटे पड़े हैं? सवाल जो कूड़ा फेंक कर गंगा तट को बदनुमा कर रहे हैं वे कसम खाने को क्यों राजी नहीं है?बहरहाल ऐसे लोग अपना भला न कर कम से कम गंगा की भलाई और उसकी आस्था को तो जानें।

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