उत्तरकाशी : जो क्वारन्टीन सेंटर सुधरने का नाम नहीं ले रहे वे दुगड़ू (ठांडी) के क्वारन्टीन सेंटर से सीखें

उत्तरकाशी : जो क्वारन्टीन सेंटर सुधरने का नाम नहीं ले रहे वे दुगड़ू (ठांडी) के क्वारन्टीन सेंटर से सीखें

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  • संतोष साह

उत्तरकाशी जिले की गाजणा पट्टी में स्थित दुगड़ू(ठांडी)के स्कूल में बने क्वारन्टीन सेंटर से उन क्वारन्टीन सेंटरों को सिख लेनी चाहिये जहाँ से अकसर ये खबरें आ रही हैं कि क्वारन्टीन में बने लोग संभल नही पा रहे हैं।

गौरतलब है कि पहाड़ कोरोना लॉक डाउन के पहले दो चरणों मे बिल्कुल सुरक्षित था। इस बीच तीसरे लॉक डाउन के बाद जब से प्रवासियों की घर वापसी हुई है तब से कोरोना भी आ धमका है। ऐसे में सुरक्षा और सामाजिक दूरी का प्रमुखता से पालन हो,क्वारन्टीन के नियमों का सही पालन हो यह जरूरी हो गया है। दुर्भाग्य है कि कई स्थानों के क्वारन्टीन सेंटर की शिकायत अकसर आ रही है कि क्वारन्टीन संभल नहीं रहे हैं और ना समझी कर रहे हैं। प्रधान से लेकर आशा,आगनबाड़ी,सरकार के कर्मी,सुरक्षा कर्मी भी ऐसे सेंटर से परेशान हैं।

जिले में कुछ ऐसे भी क्वारन्टीन सेंटर हैं जहां से अच्छी खबर भी आ रही हैं। दुगड़ू,बक्रडी,सरपंच भी परेशान हैं।
इस बीच कुछ क्वारन्टीन सेंटर से अच्छी खबर भी आ रही है। ठांडी दुगड़ू के स्कूल में क्वारन्टीन दो युवक न केवल नियम का पालन कर रहे हैं बल्कि खाली समय का बखूबी निर्वहन भी कर रहे हैं। गांव के अब्बल सिंह राणा ने बताया कि स्कूल में क्वारन्टीन टीका राम व हिकमत सिंह ने क्वारन्टीन रहते बीज बम बनाने में न केवल अपने समय का सदुपयोग किया है बल्कि
जंगली जानवरों से आबादी की फसल को बचाने का भी संदेश दिया है। इन दोनों क्वारन्टीन ने अब तक 10 हजार बीज बन तैयार कर लिये हैं। क्वारन्टीन में रह रहे उक्त दोनों ने अपने संदेश में कहा है कि बीज बम बनाने से कृषि का नुकसान बचेगा। लोकल उत्पादन बढ़ेगा। प्रधानमंत्री का वह संदेश भी इन्होंने बताया जिसमे प्रधानमंत्री ने लोकल उत्पादन,लोकल कार्य की ओर भी फोकस किया था।

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