उत्तरकाशी : इसे कहते हैं सोच! पुल भूतों के लिये नही इंसान के लिये बनाया तो वह भी डबल काम आया

उत्तरकाशी : इसे कहते हैं सोच! पुल भूतों के लिये नही इंसान के लिये बनाया तो वह भी डबल काम आया

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी नगर के केदारघाट(मोक्षघाट) में बने पुल की 2012 में आपदा आने से पहले बड़ी चर्चा हुआ करती थी। वर्ष 2007 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी रहे तो तब विधायक गोपाल रावत ने केदारघाट में नदी पार करने के लिये यहां झूला पुल स्वीकृत कराया था। यहाँ पुल को स्वीकृत कराने की सोच विधायक रावत की यह थी कि इस घाट के दोनों ओर इंसान के अंतिम दर्शन औऱ उसकी चिता में लकड़ी देने के साथ ही उसे अंतिम विदाई देने के लिये लोगों को दिक़्कत न हो।

विधायक का यह भी मानना था कि यदि घाट के एक ओर चिता में लकड़ी देने के लिये यदि घाट के दूसरी ओर के व्यक्ति को जल्द आना है तो वह कैसे नदी पार करेगा या फिर कितना घूम कर व रास्ता तय कर कब तक अंतिम दर्शन के लिये एक सिरे से दूसरे सिरे में पहुंचेगा लिहाजा इस जुनून कार्य को लेकर उन्होंने यहां पुल बनवाना ही बेहतर
समझा।

गौरतलब है कि जब यहाँ पुल का निर्माण शुरू हुआ तो कई महानुभाव यह भी कहने लगे कि केदारघाट में क्या भूतों के लिये पुल बन रहा है शायद इनकी सोच इतनी ही रही होगी। इन्होंने कभी सोचा होगा कि एक दिन यही पुल वरदान भी साबित होगा। साल 2012 और 2013 में गंगा भागीरथी में आई बाढ़ में नगर के अंदर यही पुल अंततः वरदान साबित हुआ औऱ इंसान के आपातकालीन स्थिति में काम आया। इस पुल की मेहरबानी रही कि जिसने आपदा कंट्रोल का काम किया। इसी पुल ने एक बहुत बड़ी आबादी को राहत पहुंचाई वरना पुल न होता तो एक बहुत बड़ी फजीहत औऱ भारी मुसीबत का सामना पब्लिक को करना पड़ता।

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