उत्तरकाशी : सुगम में ही नहीं अब गंगोत्री विधानसभा के सबसे दुर्गम गांव पिलंग में भी मत्स्य पालन,यहां सिल्वर फिश बढ़ाएगी टैंकों की शोभा

उत्तरकाशी : सुगम में ही नहीं अब गंगोत्री विधानसभा के सबसे दुर्गम गांव पिलंग में भी मत्स्य पालन,यहां सिल्वर फिश बढ़ाएगी टैंकों की शोभा

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

अब दुर्गम इलाकों में भी गांव में ही रोजगार व आर्थिकी को मजबूत करने की अच्छी खबर मिलने लगी है। विकास की किरण दुर्गम में भी पहुंचने का संदेश गंगोत्री विधानसभा का सबसे दूरस्थ गांव पिलंग दे रहा है। 12 किलोमीटर पैदल दूरी पहाड़ियों की पगडंडियों को तय कर पिलंग पहुंचना पडता है। एक तरह से यहाँ के बाशिंदों की लाइफ बहुत ही टफ है।

गौरतलब है कि इतनी दूरी औऱ दुर्गम होने के बावजूद गांव में मत्स्य पालन के प्रति लगाव व शौक बढ़ना एक अच्छी खबर है। गांव में एक मत्स्य टैंक बनने के बाद गांव के कई लोग इसे आर्थिकी के लिये फायदेमंद मानकर मत्स्य पालन के लिये प्रस्ताव देने लगे हैं।

गौरतलब है कि पिलंग गांव के नागेंद्र सिंह ने मत्स्य पालन के लिये टैंक बनाये जाने की शुरुआत की है। टैंक बन चुके हैं देरी मछलियों के बीज आने की। सहायक निदेशक मत्स्य प्रमोद कुमार शुक्ल ने बताया कि पिलंग में मनरेगा व मत्स्य विभाग के संयुक्त प्रयास से टैंक का निर्माण हो चुका है। काशीपुर से कार्प फिश वैरायटी जिसमे कॉमन ग्रास व सिल्वर फिश के बीज मंगाए जा रहे हैं जिन्हें पिलंग पहुंचाकर वहां बने टैंकों में डाला जायेगा।

सहायक निदेशक ने बताया कि गांव में टैंक बन जाने औऱ उसमे मछली पालन को लेकर गांव के अन्य लोगों की भी लालसा बढ़ गई है। गांव के कई लोग मत्स्य पालन के लिये अपने प्रस्ताव,पत्र आदि भी दे चुके हैं। सहायक निदेशक ने भी माना कि इतने दूरस्थ गांव में मत्स्य पालन बेहतर सोच का संकेत व स्वरोजगार का भी संदेश दे रहा है।

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