उत्तरकाशी : अपने ही इंजीनियर की मौत के बाद भी नहीं जागा निगम,स्लैब और सडक के बीच मौत का गड्डा कहीं फिर न ले किसी की जान

उत्तरकाशी : अपने ही इंजीनियर की मौत के बाद भी नहीं जागा निगम,स्लैब और सडक के बीच मौत का गड्डा कहीं फिर न ले किसी की जान

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

जल विद्युत निगम के दफ्तर के ठीक पीछे मनेरा को जाने वाले मार्ग में निगम द्वारा गांव के रास्ते के लिये नाले के ऊपर बनाये गए नए स्लैब औऱ सडक के बीच बना गैप जानलेवा साबित हुआ है।

नाले के ऊपर बने स्लैब और नए स्लैब के किनारे पहले से मौजूद सडक के बीच जो गैप रखा गया यदि उसको सडक से ही पाट दिया गया होता य्य फिर सडक और स्लैब के बीच गैप में दुर्घटना के खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम जिसमे बैरिकेटिंग,पिलर य्य फिर लोहे के फैंसी जाले डाल दिए गए होते तो इंजीनियर की शायद जान बच जाती। गौरतलब है कि निगम के इंजीनियर की मौत एक दिन पहले इसी स्थान पर हुई। सवाल सबसे बड़ा की जिस इंजीनियर को स्लैब और सडक के बीच के गैप की जानकारी थी फिर भी वह दुर्घटना का शिकार हो गया जो इस बात के संकेत दे रहा है कि दुर्घटना स्थल कितना खतरनाक होगा।
इस बीच निगम ने अपने ही इंजीनियर को खो देने के दो दिन बाद भी इस डेंजर जोन की सुध नही ली है औऱ न ही सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम किए है। लिहाजा ऐसी स्थिति में कब कोई अनहोनी हो जाय इस बात से भी इंकार नही किया जा रहा है। और तो औऱ इस डेंजर जोन में स्लैब औऱ सडक के बीच के फासले का औचित्य भी लोगों के गले इसलिए भी नहीं उतर रहा है कि आंखिर स्लैब और सडक के बीच चंद फासले का गैप रखने वाली यह कौन सी इंजीनियरिंग थी जो मौत की दावत दे रही है।

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