उत्तरकाशी : एनजीटी का सवाल नहीं, गंगा में सब स्नान कर चुके तो फिर आकाश गंगा ने क्या बिगाड़ा?

उत्तरकाशी : एनजीटी का सवाल नहीं, गंगा में सब स्नान कर चुके तो फिर आकाश गंगा ने क्या बिगाड़ा?

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  • संतोष साह

जाहिर है कि एनजीटी के मानक और आदेशों का कहीं पालन होता नहीं दिख रहा है। यानि एनजीटी के कोई मायने नहीं। समस्या यह भी है कि पहाड़ में नदी किनारे बसे नगर ,देहात में यदि एनजीटी के नियम लगे तो मकान बनाना भी मुश्किल होगा। साल 2012 और 2013 में उत्तरकाशी नगर में भी गंगा तट पर नुकसान हुआ था और कई भवन बाढ़ की चपेट में भी आये थे। बाद में नदी किनारे सुरक्षा दीवार लगने के बाद हालात बदलने में देर नहीं लगी।

जिन लोगों के बाढ़ में मकान बहे व नुकसान हुआ उन्हें मुआवजा भी मिला था। इस बीच इलाका भवनों के निर्माण से फिर आबाद हो गया है। यानि गंगा में सबने डुबकी लगा ली है। इन सब के बीच एक नाम आकाश गंगा भी इसी फ्लड एरिया में 2012 तक हुआ करता था। 2013 कि बाढ़ में बहुमंजिला आकाश गंगा नदी की भेंट चढ़ गया। अब चर्चा इस बात की होती है कि जब सब फिर आबाद हो गए तो आकाश गंगा ने क्या बिगाड़ा? उसके भी आकाश से गंगा में उतरने में क्या हर्ज है?

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