आज मानव संसार मे अपनी मनोकामनाओ हेतु प्रयास करता है और पूर्ण ना होने पर क्रोध उत्तपन होता हैं परंतु क्रोध किसी भी समस्या का हल नही है:साध्वी मीनाक्षी भारती

आज मानव संसार मे अपनी मनोकामनाओ हेतु प्रयास करता है और पूर्ण ना होने पर क्रोध उत्तपन होता हैं परंतु क्रोध किसी भी समस्या का हल नही है:साध्वी मीनाक्षी भारती

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डॉ0 रणवीर सिंह वर्मा
ब्यूरो हैड उत्तर प्रदेश
सनसनी सुराग न्यूज

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पंजाबी धर्मशाला, कांधला में श्री हरिकथामृत के द्वितीय दिवस में

श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी मीनाक्षी भारती जी ने अपने विचारों में कहा कि आज मानव संसार मे अपनी मनोकामनाओ हेतु प्रयास करता है और पूर्ण ना होने पर क्रोध उत्तपन होता हैं परंतु क्रोध किसी भी समस्या का हल नही है यह बात बिल्कुल सत्य है पर आज हम आधुनिकता की अंधी दौड़ में इस कदर दौड़ रहे है की हमारे अंदर से धैर्य, क्षमा, दया, विवेक आदि गुण समाप्त होते जा रहे है अगर हमें कोई अपशब्द कहे या हमारा उपहास करे तो हम तुरंत क्रोधित हो ज्वालामुखी जैसे फट पड़ते है बदले में लावा उगलते है। जबकि हम महापुरुषों के जीवन पर दृष्टि डाले तो हर परिस्थिति में धैर्यपूर्वक विवेक और समझदारी से स्थिति को संभालने की प्रेरणा मिलती हैं

हमारे महापुरुष अपने भीतर अध्यात्म को उतारकर समस्त गुणों से जीवन को सार्थक किया अध्यात्म का अर्थ केवल आत्मा का अध्ययन है यानी जब मानव एक पूर्ण महापुरुष की शरण को प्राप्त करता है तब महापुरुष उसके मस्तिष्क पर हाथ रखकर दिव्य कपाट खोल उसी समय मानव को उसके अंतर्जगत में उतार देते है और मानव अपनी भीतरी क्षमताओं से अपने अवगुणों पर विजय हासिल कर अच्छे मानव बनकर समझ आता है और आज के समय मे समाज को अच्छे मानव की आवश्यकता है।
कथा में विष्णु प्रकाश अग्रवाल, मा0 राजकुमार सेन, मा0 घनश्याम वर्मा, भुवनेंद्र कुमार राघव MD,नरेश सैनी, कँवर पाल, जैविन्द्र सिंह,सुमेर सिंह,संजय मित्तल,माँगेराम सैनी,अशोक गोयल, श्रवण बिंदल,,विनोद मित्तल,शुभम मित्तल,संयम मित्तल,आदि उपस्थित रहे।
प्रसाद की व्यवस्था
दिनेश चंद नामदेव हलवाई की ओर से रही

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