उत्तरकाशी : गुड़,नमक, ऊन से रेडीमेड होते हुए इस बार माघ मेला लाटरी,जुए तक पहुंच गया

उत्तरकाशी : गुड़,नमक, ऊन से रेडीमेड होते हुए इस बार माघ मेला लाटरी,जुए तक पहुंच गया

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  • संतोष साह

उत्तरकाशी के माघ मेले में आने वाले सालों के लिये एक और आकर्षण जुड़ गया है और वह आकर्षण है लॉटरी और गैम्बलिंग का । गौरतलब है कि इस आकर्षण ने कहीं अधिक सैनिक मेले की कमी भी पूरी कर दी वरना पूर्व सैनिकों द्वारा भी प्रत्येक वर्ष दीपावली के अवसर पर सैनिक मेला लगाकर लाटरी और तंबोला(गैम्बलिंग) करायी जाती थी।

तीन दिन में ही लाखों के इनाम कूपन काटकर दिए जाते थे तो माघ मेले में तो पिछले एक हफ्ते से लाटरी के कूपन कट रहे हैं। सैनिक मेला नगर और आसपास के इलाकों तक ही सीमित होता था लेकिन यहाँ माघ मेले में तो हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तरकाशी का माघ पर्व पौराणिक है। प्राचीन समय मे जब यह मेला शुरू हुआ तो इस मेले में तिब्बत का नाम सबसे पहले जुड़ता था वह इसलिए कि तिब्बत के लोग मेले में व्यापार करने जा आते थे तो गर्म कपड़े,शाल,कालीन आदि यहाँ बेचकर बदले में गुड़,चीनी,नमक ले जाते थे। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद तिब्बत मार्ग सामरिक दृष्टि से बंद हो गया। तिब्बत से व्यापार बंद होने के बाद इस मेले में रेडीमेड, फेंसी ने पैर पसारने शुरू किये तो उसके बाद माघ मेले का यह पर्व व्यापार को लेकर आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गया। मेले की तस्बीर बताती है कि अब व्यापार में 1 फीसदी से भी कम स्थानीय उत्पाद बमुश्किल नजर आता है। कुल मिलाकर साल 2020 आने पर इस पौराणिक माघ मेले के आयोजन में एक और अध्याय जुड़ गया और वह है लाटरी और जुआ।

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