लोंगोवाला युद्ध 1971 के नायक मेजर कुलदीप सिंह चाँदीपुरी के जन्म दिन पर विशेष लेख

लोंगोवाला युद्ध 1971 के नायक मेजर कुलदीप सिंह चाँदीपुरी के जन्म दिन पर विशेष लेख

देवराज नामदेव व डॉ0 रणवीर सिंह वर्मा
सनसनी सुराग न्यूज शामली

लोंगेवाला की लड़ाई 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान पश्चिमी सेक्टर में हुई पहली बड़ी लड़ाइयों में एक थी. यह राजस्थान के थार रेगिस्तान में लोंगेवाला की भारतीय सीमा चौकी पर हमलावर पाकिस्तानी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच लड़ी गई थी.

मेजर कुलदीप सिंह अपने 90 जवानों के साथ भारतीय सीमा की सुरक्षा में लगे थे और सामने थे पाकिस्तान के 2000 सैनिक और 45 टैंक. कंपनी के 29 जवान और लेफ्टिनेंट धर्मवीर इंटरनेशनल बॉर्डर की पेट्रोलिंग पर थे। ब्रिगेडियर ईएन रामदास ने कहा कि चौकी की सुरक्षा के लिए या तो यहीं रुकें या फिर पैदल ही वहां से रामगढ़ के लिए रवाना हो जाएं।

पंजाब रेजीमेंट के पास दो विकल्प थे कि या तो वह और जवानों के आने तक पाकिस्तानी दुश्मनों को रोकने की कोशिश करे या भाग जाए. इस रेजीमेंट ने पहला विकल्प चुना और चांदपुरी ने यह पक्का किया कि सैनिकों और साजो समान का अच्छे से अच्छा इस्तेमाल किया जाए.

मेजर चांदपुरी और उनकी बटालियन ने पाकिस्तानी फौज का सामना अपने जवानों के साथ दिलेरी से किया, जवानों में उनमें जोश भरा और रात भर पाकिस्तानी फौज के सामने डंटे रहे. वो रात इम्तिहान की रात थी। शैलिंग के थमते कुछ सुनाई दे रहा था तो गूंज रहे शब्द ‘जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल। रात होते-होते तक इस छोटी टुकड़ी ने पाकिस्तान के 12 टैंक तबाह कर दिए थे। रात भर इसी तरह गोलाबारी जारी रही.

5 दिसंबर 1971 को सूरज की पहली किरण निकलते ही सुबह 7:03 बजे लोंगेवाला के रणक्षेत्र में एमएस बावा का विमान मंडराया। नीची उड़ान भरकर हंटर से पाकिस्तानी टी 59 टैंको को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से तीन और हंटर ने लोंगेवाला में टैंकों पर गोले दागने शुरू किए, पाकिस्तानी सेना उल्टे पांव भाग गई। पहले ही दिन कुल 18 टैंक नेस्तनाबूद हो गए। सूर्यास्त होने के बाद वायुसेना लौट गई, लेकिन अगले दिन 6 दिसंबर को हंटर ने फिर कहर बरपाना शुरू किया और पूरी ब्रिगेड व दो रेजीमेंट का सफाया कर दिया।

इस युद्ध में भारत के 2 सैनिक शहीद हुए जबकि पाकिस्तान के 200 सैनिक मारे गए 600 से ज्यादा घायल हुए और उनके 36 टैंक तबाह हो गए.

लोंगेवाला चौकी पर मिली हार को पाक सेना शायद ही कभी भुला पाएगी। इस चौकी पर कब्जा जमाने के प्रयास में दो दिन में पाकिस्तान सेना को अपने 36 टैंक, पांच सौ वाहन और दो-सौ जवानों से हाथ धोना पड़ा। इसके बावजूद चौकी पर कब्जा नहीं हो सका। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में यह पहला अवसर था जब किसी सेना ने एक रात में इतनी बड़ी संख्या में अपने टैंक गंवाए हों।

एक इंटरव्यू के दौरान चांदपुरी ने उस लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं ठहरा पंजाबी का बेटा मैं कहां पीछे हटने वाला था। हम बिना किसी डर के दुश्मन सेना पर टूट पड़े।

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी 22 नवंबर 1940 को पंजाब के मांटगोमेरी में जन्मे थे जो अब पाकिस्तान में है। भारत सरकार ने उन्हें युद्ध के दौरान दिए गए योगदान के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया.

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