उत्त्तरकाशी : कूड़ा फेकने का मामला गरमाया : फारेस्ट एक्ट के तहत 2 साल की सजा व हो सकती है कूड़े की घर वापसी

उत्त्तरकाशी : कूड़ा फेकने का मामला गरमाया : फारेस्ट एक्ट के तहत 2 साल की सजा व हो सकती है कूड़े की घर वापसी

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

नगर मे जहां देखो वहाँ कूड़े की ही चर्चा है। यानि कुड़े का मामला गरमा रहा है। रिज़र्व फारेस्ट औऱ गंगा मे उड़ेली गई गंदगी पालिका के लिये भारी पड़ गई है। वन विभाग ने नगर की गंदगी को उसके घर मे डाले जाने की रिपोर्ट तैयार कर ली है। वन अधिनियम की धारा 26 के तहत नगर पालिका के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। डीएफओ संदीप कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है।

वन अधिनियम की धारा 26 के तहत कार्यवाही के प्राविधान को लेकर उनका कहना था कि यह तो कोर्ट ही तय करेगा लेकिन वन भूमि मे गंदगी के ढेर फेंके जाना भी एक अपराध है इसलिए इसमें संभवतः 2 साल की सजा हो सकती है साथ ही कूड़े को फेकने वाले जिम्मेदार लोंगो को कूड़ा भी उठाना पड़ सकता है। इधर धारा 26 के तहत मामला नगर पालिका पर दर्ज करने की बात के बीच पालिका के कौन अधिकारी व कर्मचारी कूड़े को वन भूमि मे ठिकाने लगाने के जिम्मेदार है इस पर वन विभाग मुँह नहीं खोल रहा है।

इससे साफ होता है कि अंदर खाने कुछ न कुछ तो गड़बड़ है। वैसे किस विभाग द्वारा किये गए कार्य की जवाबदेही उस विभाग के अधिकारी की होती है। गौरतलब है कि जब रामलीला मैदान से कूड़े को उठाकर नगर से दूर फारेस्ट भूमि मे डाला गया था तो उस दिन पालिका प्रशासनिक बॉडी के पास थी और इसके एक दिन बाद नई पालिका बोर्ड का शपथ ग्रहण हुआ था।

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