उत्तरकाशी : खतरे को नजरअंदाज कर पुल की बेरिकेट पर फिर निशाना,सुरक्षा में व्यवस्था हुई फेल

उत्तरकाशी : खतरे को नजरअंदाज कर पुल की बेरिकेट पर फिर निशाना,सुरक्षा में व्यवस्था हुई फेल

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित पुल में कैसे भारी वाहन बेरिकेट को तोड़ कर जबरन घुस रहे हैं इस पर नियंत्रण होता तो बेरिकेट टूट कर अलग पड़ी न होती। व्यवस्था बनी होती तो पुल के नजदीक चेतावनी साइन बोर्डों के भी कोई मायने होते। सबसे बड़ा सवाल की पुल कमजोर है बड़े वाहनों के लिए खतरे से खाली नही है।

पुल को अधिक लोड से खतरा है इसकी जांच भी हो चुकी है लेकिन रिस्क कौन ले रहा है जो बेरिकेट को लांघने की कोशिश कर रहे हैं। अभी पिछले दिनों ज्ञानसू की तरफ बेरिकेट तोड़ी गई और अब जोशियाड़ा की तरफ भी बेरिकेट को फेंक कर जो खतरा मोल लेने के साथ ही नियम- कानून ताक में रख इसका उलंघन हुआ है वह पुल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। चार धाम यात्रा का समय है लेकिन पुल की सुरक्षा औऱ बाहर से आने वाले वाहनो को ट्रैफिक डायबर्ट की पुख़्ता जानकारी न मिलना भी एक तरह से सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि आचार संहिता की आड़ में जो अवैध खनन हो रहा है,देर रात्रि में अवैध खनन से लदे भारी मिनी ट्रक भी गुपचुप इस पुल का ही सहारा लेते हैं। बहरहाल कमजोर पुल की सुरक्षा में लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है।

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