उत्तरकाशी : काशी-बनारस का मणिकर्णिका हो या फिर उत्तरकाशी का,महत्व व फल एक ही

उत्तरकाशी : काशी-बनारस का मणिकर्णिका हो या फिर उत्तरकाशी का,महत्व व फल एक ही

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  • संतोष साह

उत्तरकाशी और काशी बनारस में मणिकर्णिका घाटों की बनावट भले ही अलग हो लेकिन महात्म्य व महत्व लगभग एक समान ही है। मसलन काशी व उत्तरकाशी के मणिकर्णिका घाट में गंगा स्नान से लेकर गंगा आरती का एक ही महत्व मन जाता है। यह भी कहा जाता है कि उत्तरकाशी के मणिकर्णिका में यदि स्नान कर लिया तो समझो काशी बनारस के मणिकर्णिका में ही स्नान कर लिया।
यह तो सर्व विदित है कि धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर शुभ काम, गंगा स्नान में पड़ने वाले त्योहारों, व्रतों व जलाभिषेक के लिये जब गंगा के उत्तरकाशी के किसी घाट में जाना हो तो वह घाट मणिकर्णिका ही है। देव डोलियां जब स्नान के लिये पहुंचती है तो वह भी मणिकर्णिका में ही। यानि मणिकर्णिका पहले देव डोलियों का स्नान घाट माना जाता रहा है और आज भी यह धार्मिक परंपरा कायम है।

मणिकर्णिका में मां गंगा का प्राचीन मंदिर है। स्कन्द पुराण के केदारखंड में मणिकर्णिका की पवित्रता का उल्लेख है। इस उल्लेख में इस घाट के महत्व को काशी बनारस के घाट के बराबर माना गया है। इस घाट में स्नान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इसे पापविमोचन तीर्थ भी कहते हैं। केदारखंड के अनुसार मणिकर्णिका में पहले एक ब्रह्मकुंड भी हुआ करता था। समय-समय पर गंगा भागीरथी में बाढ़ आने से हालांकि अब यह कुंड नही रहा मगर कुंड की जो मान्यता थी उसके मुताबिक ब्रह्मकुंड में स्नान करने से ब्रह्मलोक प्राप्त होता था और सातों जन्मों के पाप छूट जाते थे।
इधर मौजूदा समय मे नमामि गंगे की वजह से इस मणिकर्णिका में काफी हद तक रौनक लौट आई है। देश-विदेश के तीर्थ यात्री भी अब काफी संख्या में यहाँ पहुंचकर गंगा आरती के भागीदार बन रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिये भी यह घाट आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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