गुरु कृपा से सभी कार्य संभव है स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज, कैराना के प्राचीन सिद्धपीठ बाबा बनखंडी महादेव मंदिर मे श्री भागवत कथा का प्रथम दिन

गुरु कृपा से सभी कार्य संभव है स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज, कैराना के प्राचीन सिद्धपीठ बाबा बनखंडी महादेव मंदिर मे श्री भागवत कथा का प्रथम दिन

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सनसनी सुराग न्यूज
विशाल भटनागर/डॉ0 रणवीर सिंह वर्मा

कैरानानगर के प्राचीन सिद्धपीठ बाबा बनखंडी महादेव मंदिर मे श्री भागवत कथा के प्रथम दिन स्वामी स्वरूपानंद जी ने कथा का विस्तार से व्याख्यान किया, वही उन्होंने कहा कि गुरु कृपा से सभी कार्य सम्भव है ,कृपा से पाप कर्मों का विनाश और पुण्य कर्मों का उदय होता है l उन्होंने बताया कि भागवत भक्तों की कथा है महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमदभागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है आवश्यकता है निर्मल मन ओर स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानन्द की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है।

उन्होंने अच्छे ओर बुरे कर्मो की परिणिति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी ओर गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मो के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया ओर धुंधकारी द्वारा एकाग्रता पूर्ण भागवत कथा श्रवण से प्रेतयोनी से मुक्ति बताई तो वही धुंधकारी की माता द्वारा संत प्रसाद का अनादर कर छल.कपट से पुत्र प्राप्ती ओर उसके बुरे परिणाम को समझाया।मनुष्य जब अच्दे कर्मो के लिए आगे बढता है तो सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है ओर हमारे सारे कार्य सफल होते है। ठीक उसी तरह बुरे कर्मो की राह के दौरान सम्पूर्ण बुरी शक्तियॉ हमारे साथ हो जाती है। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है। छल ओर छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दुध हमेशा फटेगा। छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है- निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। छलछिद्र रहित ओर निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है।पहले दिन भगवान के विराट रूप का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
इस माैके पर पंडित स्वराज्य शर्मा ,संत कुमार राधेश्याम शर्मा, सुशील शर्मा, मनीष शर्मा ,बेबी शर्मा व अंकुर भारद्वाज आदि शामिल रहें

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