उत्तरकाशी : रास्ते का हल निकालने में नाकाम हुए तो गंगा घाट की सीढ़ियों मे घुसा दी सीवर लाइन

उत्तरकाशी : रास्ते का हल निकालने में नाकाम हुए तो गंगा घाट की सीढ़ियों मे घुसा दी सीवर लाइन

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी के एक गंगा घाट की सीढ़ियों को तोड कर उसके अंदर से सीवर लाइन कनेक्ट की जा रही है। गौरतलब है कि यह कोई पुराना घाट नही है बल्कि आपदा आने के बाद करीब 50 लाख की लागत से नया घाट बना है। इस घाट से सभी वाकिफ हैं।

सूत्रों के अनुसार इस घाट मे सीवर लाइन डालने के पीछे असल वजह रास्ते का सोलुशन न निकलना बताया जाता है जबकि ठीक इसके उलट गंगा घाट से सीवर ले जाने पर जो तर्क दिया जा रहा है वह डाउन होने और पाइपों मे फ्लो बने रहने की चर्चा की जा रही है ताकि पम्पिंग स्टेशन तक कोई दिक्कत न हो।

अब सवाल ये है कि गंगा घाट की सीढ़ियों के अंदर सीवर लाइन और सीढ़ी के ऊपर गंगा आरती हो तो कुछ अटपटा जरूर लगता है वह भी गंगा की भावनाओं से लेकर एनजीटी के निर्देशों तक जिसमें एनजीटी ने गंगा किनारे लिटर, डेफिकेट यानि मल-मूत्र की सख्त मनाही की है।
उल्लेखनीय है कि जिस गंगा घाट मे ऐसा कुछ हो रहा है उस घाट का इसी साल विधायक गोपाल रावत,डीएम डॉ आशीष चौहान के कर कमलों से श्री गणेश हुआ।

इसी घाट मे विधायक और डीएम ने गंगा आरती शुरू कराई थी। इसी घाट मे फ्लोटिंग के ऊपर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी गंगा आरती की।इसी घाट मे विधायक और डीएम ने वोटिंग का शुभारंभ किया था। इसी घाट मे इंटरनेशनल योगा डे पर योग वह भी फ्लोटिंग के उपर हुआ था। इसी घाट पर विधायक और डीएम ने कैफ़े ऑन द वेव भी शुरू कराया था जो अब बंद है।

सवाल लोंगो के बीच यह खटक रहा है कि इस घाट के इतने हाइलाइट्स होने के बाद इस घाट की सीढ़ियों मे सीवर पाइप लाइन और घाट की दशा बिगाड़ने की क्या जरूरत पड़ गई और कोई रास्ता ढूंढा जा सकता था। यह अब हर दिन घाट को देखने वालों के गले भी नही उतर रहा है। इधर उत्तरकाशी मे सीवरेज को देखने और उसकी प्लानिंग का काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का है।

इनसे जानना चाहा कि रास्ता छोड़ गंगा घाट की सीढियो मे सीवर पाइप लाइन क्यों घुसाई जा रही तो जवाब मे इकाई की प्रोजेक्ट मैनेजर शशि राणा का जवाब था कि मनेरी-भाली जोशियाड़ा की कॉलोनी की इस सीवरेज लाइन को भागीरथी पैलेस के नजदीक पम्पिंग हाउस तक लाने के लिये इसका कार्य जल विद्युत निगम के द्वारा गो रहा है यानि इकाई के सुपरविजन मे निगम पैसे खर्च कर रहा है। लेकिन घाट से सीवर लाइन पर प्रदूषण नियंत्रण इकाई का कोई जवाब नहीं था।

इधर जोशियाड़ा अब म्युनिस्पैलिटी के अधीन आ गया है तो इस बारे मे बेहतर जानने के लिए जब एसडीएम देवेन्द्र नेगी से जानना चाहा तो उनका कहना था कि सीवर लाइन पाइप से है और बंद है इसलिए गंदगी और प्रदूषण का सवाल ही पैदा नही होता। उन्होंने कहा कि पाइप लाइन को ग्राउंड लेबल मे रखा गया होगा ताकि फ्लो बना रहे।

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