उत्तरकाशी : जिला पंचायत, पंचायत नहीं राजनीति का अखाड़ा बनी,तीन माह से हो रही कुर्सी की जंग

उत्तरकाशी : जिला पंचायत, पंचायत नहीं राजनीति का अखाड़ा बनी,तीन माह से हो रही कुर्सी की जंग

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

एक वाक्या ठीक ही बना है कि हम तो डूबे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे ठीक यही कुछ पिछले तीन चार माह से जिले की सर्वोच्च उस पंचायत में चल रहा है जिसमे चुन कर पंचायत के लोग आते हैं। हालांकि एक पद को लेकर राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है लेकिन इससे पूरी पंचायत से लेकर पंचायत कर्मियों औऱ पंचायत की व्यवस्था ही चरमरा गई है।
गौरतलब है कि जिला पंचायत के जिले के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी पंचायत के अंतिम बचे 6 माह के कार्यकाल में उहापोह की स्थिति बनी होगी। कुर्सी के चक्कर मे पहले ही अगले 5 साल के लिये पंचायत को अलविदा करने व पंचायत से नगर की ओर पासा पलटने की जो रणनीति पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने रची थी कि वह पासा ऐसा उल्टा पड़ा कि न तो पंचायत के हो सके और न ही नगर के। इसके बाद एक तरह से जिला पंचायत अधर में लटकती नजर आई और यह स्थिति अब भी बरकरार है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी जाने से पूर्व वह 31 मार्च तक के बजट को फाइनल कर गई थी। इसके बाद तीन सदस्यों को जिला पंचायत की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी मिली।

तीन सदस्यों की नेम प्लेट,तीनों के बैठने की व्यवस्था के इंतजाम होने के बाद जैसे ही त्रिस्तरीय स्तर के आदेशों से जिला पंचायत की दो दिन की बैठक आहूत की गई तो उससे पहले यहां भी पानी फिर गया। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को इस सिलसिले में एक सूचना जारी करानी पड़ी की हाई कोर्ट के तीन सदस्यीय समिति को निरस्त करने के आदेश की प्रति उन्हें नहीं मिली है लिहाजा आदेश की प्रति प्राप्त होने की प्रत्याशा में बैठक को स्थगित करना पड़ा है। यानि अब भी जिला पंचायत में संशय बरकरार है।
इस बीच पिछले तीन माह से जिला पंचायत में कुर्सी को लेकर मचे घमासान का सीधा असर जिला पंचायत के प्रशासनिक व विकास कार्यो पर पड़ रहा है। पिछले तीन माह से न तो जिला पंचायत में भुगतान की स्थिति बनी है और न ही कर्मचारियों को वेतन मिला है। यात्रा व्यवस्था खासकर यमुनोत्री में जिला पंचायत पर व्यवस्था के नाम पर सवाल उठ चुके हैं औऱ खासा बवंडर भी हो चुका है। जनता की राय में अब तो नई पंचायत गठित होने के बाद ही जिला पंचायत की व्यवस्था दुरुस्त हो सकती है।

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