बरकतों व बख्शिश का महीना है रमज़ान

बरकतों व बख्शिश का महीना है रमज़ान

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सिर्फ रमज़ान के महीने में होता है तरावीह का एहतेमाम

मौ० रविश

लावड़। मुस्लिमों के लिए साल का सबसे खास महीना समझा जाने वाला रमज़ान उल मुबारक आज शुरू हो गया है। देर रात तरावीह के साथ मस्जिदों में कुरान ए करीम की तिलावत का दौर शुरू हो गया है।

तीन अशरो में बंटा है महीना-

क़स्बा स्थित मदरसा फैज़ुल इस्लाम के मोहतमिम हाफ़िज़ इब्राहिम ने बताया कि अल्लाह पाक ने इस महीने को अशरो 3 में बांटा है। पहले 10 दिनों में अल्लाह ताला की रहमत बारिश की बूंदो के कतरों की तरह अपने बंदों पर बरसती है। दूसरे अशरे में अल्लाह पाक अपने बन्दों की मगफिरत फरमाते हैं। वही तीसरे व आखिरी अशरे में अल्लाह पाक अपने गुनाहगार बन्दों को दोज़ख की आग से आजाद करते हैं।

इस महीने में बढ़ जाती है इबादत-

मौलाना असजद ने बताया कि वैसे तो पूरे साल ही मुस्लिमों पर अल्लाह की इबादत फर्ज है मगर इस महीने में इबादत करने वालों की तादाद में खासा इजाफा हो जाता है, क्योंकि इस महीने में अल्लाह तआला नवाफिल का सवाब फ़राएज़ के बराबर और फ़रायज़ का सवाब बढ़ाकर 70 गुना से भी ज्यादा कर देते है।

रमजान में ही आती है शबे कद्र की रात-

मस्जिद कुरैशियान के इमाम हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान ने बताया कि इस महीने के आखिरी अशरे यानी आखिरी 10 दिनों की ताक रातों में से एक रात होती है जिसे शबे कद्र कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इस रात की इबादत हज़ार महीनों की नफली इबादत से बेहतर है। उन्होंने बताया कि आप मोहम्मद सल्ल० ने फरमाया कि जिसे ये रात नसीब हो गयी गोया कि उसको हर खैर मिल गई हो, और जो इस रात से महरूम रह गया वह हर भलाई से महरूम रह गया।

हर मुसलमान पर फर्ज है रोजा-

कारी ओसामा ने बताया कि अल्लाह तआला ने रमजान के महीने में हर बालिग मुसलमान मर्द व औरत पर रोजे फ़र्ज़ किये है। उन्होंने बताया कि अल्लाह पाक क़ुरआने करीम में फरमाते हैं कि ईमान वालों हमने तुम पर रमजान के रोजे फर्ज किए हैं जैसा कि तुम से पहली उम्मतों पर फ़र्ज़ किए गए हैं, जिससे कि तुम मुत्तक़ी बन जाओ। पूरे महीने के रोजे रखना फर्ज और जरूरी करार दिया गया है। अगर कोई शख्स किसी बिना किसी शरई मजबूरी के रोजे छोड़ दे तो वो अल्लाह पाक की नाफरमानी करेगा और सख्त गुनहगार होगा।

सिर्फ रमजान के महीने में होता है तरावीह का एहतेमाम-

हाफ़िज़ अजमल ने बताया कि पूरे साल में सिर्फ रमजान के महीने में तरावीह का एहतेमाम किया जाता है। रमजान महीने का चांद दिखते ही तरावीह शुरू हो जाती है और ईद के चांद दिखने तक जारी रहती है। अल्लाह के नबी मुहम्मद स० ने फरमाया कि पूरे महीने की तरावीह पढ़ना अलग सुन्नत है और तरावीह में कुरान का सुनना अलग सुन्नत है।

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