Exclusive : जीरो टॉलरेन्स : उत्तरकाशी : साहब मीटिंग में या फिर देहरादून तो फिर जनता का क्या काम ?

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी मे यदि आला अफसर अपने दफ्तर के आगे लगी प्लेट से जनता से मिलने के समय को मिटा दे या फिर हटा दें तो कम से कम जनता तो मूर्ख नहीं बनेगी। गौरतलब है कि उत्तरकाशी जिला मुख्यालय में आला अफसरों की कार्यालय से अधिकांश समय गैर मौजूदगी चाहे वह मीटिंग से हो या फिर देहरादून यानि राजधानी दौरे से इसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

खासकर उन लोगों को कहीं अधिक दिक़्कत होती है जो दूर दराज से अपनी जेब ढीली कर अपनी व अपने इलाके की समस्या को लेकर जिला मुख्यालय संबंधित अधिकारी से मिलने आते हैं लेकिन कार्यालय पहुंचने पर पता चलता है कि साहब या तो कलेक्ट्रट मीटिंग में हैं या फिर देहरादून में हैं। सबसे बडा सवाल दूर दराज के व्यक्ति यदि अपनी फ़रयाद लेकर अधिकारी से मिलने आता है और उसे अधिकारी नही मिलता है तो वह क्या करे यही वजह है कि अब अधिकांश लोग सीधे शासन में ही जाना बेहतर मानते हैं।

मुख्यमंत्री के दरबार में भी लोग पहुंच जाते हैं अपनी फ़रयाद लेकर। जबकि मुख्यमंत्री से लेकर सरकार की मंशा है कि आम जनता के कार्य उसके ब्लॉक,तहसील या जिले में हो जाएं औऱ उसे राजधानी के चक्कर न काटने पड़े।
इधर उत्तरकाशी मे मीटिंग्स पे मीटिंग्स आये दिन होना आम बात है। हालांकि मीटिंग जनता के हितों के लिये ही होती है लेकिन इन मीटिंग्स के चक्कर मे अधिकारी से मिलने आया फरयादी परेशान रहता है क्योंकि उसे अधिकारी नहीं मिल पाता है इसलिए फरयादी को बैरंग लौटना पड़ता है। इधर कई अधिकारी जो कि अपनी पीड़ा बयां नही करते वे भी मीटिंग्स से तंग आ चुके हैं। एक अधिकारी ने तो नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ मीटिंग्स का तो समय औऱ दिन फिक्स होता है लेकिन कुछ मीटिंग्स किसी भी समय चाहे दिन हो या फिर शाम ढल जाए हो जाती है। जिससे कार्यालय के कार्य और फाइलें भी धरी रह जाती हैं।

बहरहाल अब यदि कोई फरयादी जिले के मोरी विकास खंड के किसी गाँव से अपनी या फिर इलाके की समस्या लेकर जिला मुख्यालय किसी अधिकारी से मिलने आता है और अधिकारी मीटिंग में है तो उस फरयादी के नुकसान की भरपाई कौन करेगा ? याद रहे मोरी की जिला मुख्यालय से दूरी 200 किलोमीटर है।

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