Exclusive : उत्तरकाशी :इको सेंसेटिव मे खनन की मौज,माल फ्री पर कमिसन नहीं

Exclusive : उत्तरकाशी :इको सेंसेटिव मे खनन की मौज,माल फ्री पर कमिसन नहीं

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

इको सेंसिटिव मे खनन पर कागजों मे सख्ती व प्रतिबंध है। लेकिन नदी से चुगान रुकता नही है। इसके लिये खच्चर, घोड़े वरदान साबित हो रहे हैं और खनन वालोँ की मौज पड़ी है क्योंकि बगैर धेला खर्च किये औऱ सिर्फ घोड़े खच्चर को चने खिलाकर नदी से फ्री का माल मिल रहा है। माल की कीमत बाजार में क्या कुछ है सभी जानते है। तो हुई न मौज। खच्चर रखने औऱ उसे चलाने को रोजगार भी मानकर चला जाता है फिर चाहे उससे अवैध खनन का ही रोजगार क्यों न जुड़ा हो।

इको सेंसिटिव मे नदी के तटबंधों से माल निकलने को लेकर इसमें एक ओर कड़ी जुड़ी है और वह है महीना। खनन बगैर संरक्षण के कभी खुलेआम नहीं हो सकता। सूत्रों की माने तो खच्चरों की जोड़ी पर महीना या फिर हफ्ता बंधा होता है। इसलिए एक तीसरी कमाई का भी यह एक बहुत बड़ा गिफ्ट माना जाता है।

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