Exclusive: उत्त्तरकाशी : मुंगेरीलाल के हसीन सपने बताने वालों के सामने खुदानाखास्ता सपना सच हो जाए तो बुरा क्या ?

Exclusive: उत्त्तरकाशी : मुंगेरीलाल के हसीन सपने बताने वालों के सामने खुदानाखास्ता सपना सच हो जाए तो बुरा क्या ?

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संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी व देहरादून के बीच की दूरी को कम करने के लिए यदि सुरंग का मसौदा औऱ प्रस्ताव यदि भारत सरकार के सम्मुख भेजा गया है तो इसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने बताने के बजाय दुआ होती कि यह सपना पूरा हो जाए तो इसमें क्या बुराई थी। दरअसल मामला देहरादून से उत्तरकाशी की दूरी कम हो जाए इसके लिए प्रदेश सरकार से केंद्र सरकार को पत्र व प्रस्ताव भेजे गए हैं।

बाकायदा सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उत्तरकाशी औऱ देहरादून की दूरी कम हो जाए इसके लिए अपनी ओर से भी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा गया है। इस पत्र में उन प्रस्तावों को मंजूरी दिये जाने का अनुरोध किया गया है जो प्रस्ताव गंगोत्री विधायक गोपाल रावत ने केंद्रीय परिवहन मंत्री को दिल्ली मे सौपें थे।

उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव और मांग मे नगुण से सुवाखोली तक के मार्ग को एनएच बनाने के साथ ही सहस्त्रधारा से भवान और भवान से चिन्यालीसौड़ तक सुरंग बनाये जाने की मांग का जिक्र था। जिसके बाद सुरंग निर्माण को लेकर इसके सर्वे करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चीफ एग्जीक्यूटिव स्टेट लोक निर्माण विभाग को लिखा भी गया था।
इधर अब गेंद केंद्र के पाले में है। केंद्र इसको मंजूरी देगा या नहीं लेकिन उम्मीद भी नहीं छोड़ी जानी चाहिए।

इस बात से भी इनकार नही किया जा सकता कि लोक सभा चुनाव नजदीक है कहीं उक्त तोफा मिल जाए। सुरंग नही तो एनएच ही मिल जाए औऱ यदि सुरंग भी मिल जाए तो मौज औऱ एक बहुत बड़ी राहत होगी। एनएच से मार्ग दुरुस्त होगा और दुर्घटना की आशंका पर लगाम लगेगी तो वहीं सुरंग बन जाए तो उत्तरकाशी औऱ देहरादून की दूरी करीब 60 किलोमीटर घट जाएगी। यानि उत्तरकाशी से देहरादून की दूरी तब 80 किलोमीटर रह जाएगी। ऐसे में चिन्यालीसौड़, देविधार,डुंडा की वैल्यू भी कही अधिक बढ़ जाएगी। बहरहाल दुआ होनी चाहिए कि इसे मुंगेरी लाल का हसीन सपना न कहा जाए बल्कि सपना साकार होना चाहिए । यह सपना खुदाना खास्ता साकार होता है तो कितनी बड़ी राहत होगी उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

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