उत्तरकाशी : टिहरी संसदीय सीट में भाजपा- कांग्रेस आमने- सामने,स्थानीय मुद्दे गायब,मतदाताओं के रुझान में चौकीदार व राष्ट्रवाद भारी

उत्तरकाशी : टिहरी संसदीय सीट में भाजपा- कांग्रेस आमने- सामने,स्थानीय मुद्दे गायब,मतदाताओं के रुझान में चौकीदार व राष्ट्रवाद भारी

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

टिहरी संसदीय सीट के लिये उत्तरकाशी जिले की तीन विधानसभा गंगोत्री, यमुनोत्री व पुरोला का मिजाज भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला होना बता रहा है। यानि 11 अप्रैल को होने जा रहे मतदान में भाजपा व कांग्रेस आमने सामने होंगे। शुरुआत में एक निर्दलीय को लेकर जो त्रिकोणीय मानकर चल रहे थे अलबत्ता वह मतदाताओं के माहौल व रुझान में कम ही नजर आया है। वैसे पिछले लोकसभा चुनावों की बात करें तो पहाड़ भी लोकसभा चुनाव में देश की राजनीति की ओर रुख करता रहा है।
इस बार भी चुनावी माहौल में स्थानीय मुद्दे लगभग गायब ही नजर आए। इस बार देश की राजनीति की चर्चा के बीच मतदाताओं में चौकीदार से लेकर राष्ट्रवाद पर भी बहुत कुछ सुनने को नजर आया। इसमे कोई बताने वाली बात नही कीभाजपा प्रत्याशी को लेकर मतदाताओं के बीच सवाल न उठे हों लेकिन इस सवाल के जवाब में चौकीदार जरूरी भारी पड़ता नजर आया है तो वही कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर भी सवक़्ल उठे की वे सिर्फ पूर्व में जिले के प्रभारी मंत्री रहे हैं और तब उनकी जिले की पब्लिक से दूरी ही रही।
गंगोत्री विधानसभा में भाजपा से विधायक गोपाल रावत,कांग्रेस से पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिये गांव – गांव जाकर संपर्क किया है,तो वही यमुनोत्री में विधायक केदार सिंह रावत तथा पुरोला में माल चंद व अपने समर्थकों सहित भाजपा में शामिल हुए दुर्गेश लाल ने भी अपने प्रत्याशी को जिताने के लिये ताकत झोंकी है। स्टार प्रचारकों की बात करें तो भाजपा की कमी अमित शाह व विजय बहुगुणा तथा मुख्यमंत्री ने पूरी की। कांग्रेस सचिन पायलट को तो लायी लेकिन वह पहाड़ के लिये एक तेरह से जाना पहचाना चेहरा नही के बराबर था। कांग्रेस मे चुनाव प्रचार की बागडोर एक तरह से स्थानीय नेताओं के ही भरोसे रही। भाजपा प्रत्याशी के लिये चुनाव प्रचार की राह इसलिए भी आसान रही क्योंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के साथ ही गंगोत्री व यमुनोत्री विधानसभा में दो विधायक भी भाजपा के हैं। इसके अलावा पुरोला विधानसभा में पिछला विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ने वाले दुर्गेश के भाजपा में शामिल होने से उसका सीधा लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिला। विधायक गोपाल औऱ केदार के किये काम भी भाजपा प्रत्याशी के खाते में ही जायंगे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। उधर बागियों के घर वापसी से कुछ फर्क पड़ने को लेकर जब मतदाताओं से जानने की कोशिश की गई तो जवाब संतोजनक नहीं मिला। जवाब यह मिला कि कोई फर्क पड़ने वाला नहीं।

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