उत्तरकाशी : कोरोना का डर नहीं,मॉर्निंग वॉक में लग रहा मानो मेला है,वह भी 7 बजे से पहले लॉक डाउन में

उत्तरकाशी : कोरोना का डर नहीं,मॉर्निंग वॉक में लग रहा मानो मेला है,वह भी 7 बजे से पहले लॉक डाउन में

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  • संतोष साह

प्रवासियों के आने के बाद से कोरोन्स का खतरा बड़ा है। यही नहीं पॉजिटिव भी निकल आये हैं। गांव से लेकर शहर में प्रवासियों की घर वापसी के बाद सतर्कता, सुरक्षा एक तरह से जरूरी हो गई है। कोरोना नेगेटिव प्रवासी भले ही 14 दिन क्वारन्टीन हो रहे हैं और उसके बाद फ्री हो रहे हैं मगर सतर्कता तब भी कोरोना संकट को देखते हुए जरूरी है। सोशल डिस्टेंस का पालन इसमे अहम है। अब सवाल उठता है कि क्या वाकई यह सब कुछ हो रहा है।

लॉक डाउन दोपहर 2 बजे से अगले दिन के सुबह 7 बजे तक निर्धारित है। सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक छूट की सीमा है। सिर्फ सरकारी कार्यालय 4 बजे तक है वह भी 50 प्रतिशत कर्मियों को लेकर और उनके लिये आईडी अपने पास रखना जरूरी है ताकि लॉक डाउन में उन्हें घर वापसी से लेकर एक से दूसरे दफ्तर में आने-जाने में दिक़्कत न हो। गौरतलब है कि एडवाइज़री में लॉक डाउन के चलते यह सब कुछ होने के बावजूद उत्तरकाशी में सुबह 5 बजे से 6 बजे के बीच नगर के आसपास की सड़कों में जिस तरह से लॉक डाउन का मजाक उड़ाकर मॉर्निंग वॉक के नाम पर मेला लग रहा है वह यह बता रहा है कि यहां कोरोना का कोई खौफ नहीं है। लॉक डाउन के इस उलंघन पर पुलिस भी कहीं नजर नहीं आती। आये भी कैसे पुलिस जिन चोराहों में ड्यूटी कर भी रही है उन चोराहों में वह अपने मोबाइल तक ही सीमित है।
बहरहाल इसमे कोई शक नही की जिस तरह से प्रवासियों के आने के बाद से कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी है वह निश्चित तौर पर अब कहीं अधिक सतर्क रहने की ओर इशारा कर रही है।

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