उत्तरकाशी : आल वेदर में न तो नियम और न ही आदेशों का पालन,पोल बरसात में खुलनी तय

उत्तरकाशी : आल वेदर में न तो नियम और न ही आदेशों का पालन,पोल बरसात में खुलनी तय

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  • संतोष साह / उत्तरकाशी

आल वेदर के निर्माण में न तो नियम औऱ न ही आदेशों का पालन हो रहा है। आल वेदर में लगी कम्पनियो की अपनी मर्जी चल रही है। आदेश चार धाम यात्रा शुरू होने से पूर्व न केवल शासन से बल्कि जिला स्तर से डीएम के माध्यम से हुए थे कि सुबह खुलने से देर शाम तक पहाड़ में मशीन न चले औऱ न ही इस दौरान रास्ता बंद हो लेकिन ठीक इसके उलट जो नहीं होना था वह हो रहा है। आम जनता से लेकर हजारों किलोमीटर का रास्ता तय कर चारधाम की यात्रा पर आने वाले देश विदेश के यात्रियों को तक दिक़्कत का सामना करना पड़ रहा है। सड़क में मलवा डालकर य्य फिर ऊपर से पहाड़ियों को काट कर पत्थरों को सडक की ओर लुढ़काने से घंटो सडक को जाम किया जा रहा है । इस मंजर को देखकर यात्रियों में भी भय का माहौल पैदा हो रहा है। सडक को जाम किये जाने से इसका असर इनेरजेंसी के कार्यों में भी पड़ रहा है।
इस बीच सूत्र बता रहे हैं कि आल वेदर निर्माण में पहाड़ियों को काटने से लेकर इसके मलवे को डंप करने का भी कोई हिसाब नहीं है। मलवे को डंपिंग जोन न बनाकर गंगा में भी उड़ेला जा रहा है। यह सब कुछ देखने की ड्यूटी वन विभाग की बनती है लेकिन वन विभाग क्यों सोया है?यह प्रश्न भी गंभीर है। उधर विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक आल वेदर निर्माण में पहाड़ियों से निकले भारी मात्रा में पत्थरों का भी गुपचुप सौदा होता है। यानि पत्थर आल वेदर के निर्माण में भी लग रहा है औऱ पीठ पीछे बिक भी रहा है इसमे किस किस की जेबें गरम हो रही है यह भी सवाल खड़े करता है।


इधर चर्चा है कि आल वेदर में जिस बदइंतजामी से कार्य हो रहा है उसकी पोल बरसात में खुलनी तय है। एक ओर लूज पहाड़ियां जहां भूस्खलन का खतरा बढ़ाएंगी तो दूसरी ओर नदी में डाला जा रहा मलवा भी किसी खतरे से कम नही है। इससे नदी में गाद बढ़ने के अलावा बाढ़ का भी खतरा पैदा हो सकता है।

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