वो हस पड़ा मेरा किस्सा तमाम होने पर, में रो पड़ा था जिसे दास्तां सुनाते हुए।

वो हस पड़ा मेरा किस्सा तमाम होने पर, में रो पड़ा था जिसे दास्तां सुनाते हुए।

- in Meerut
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मेरठ/लावड़
मौ० रविश

लावड़। क़स्बे के मोहल्ला मोमिन अंसार में शुक्रवार देर रात एक शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। प्रोग्राम की सदारत कमाल क़ुरैशी व निज़ामत शाहिद हसन शाहिद ने की। प्रोग्राम की शुरुआत नाते नबी के साथ हुई। उसके बाद
यमली खां ने अपना कलाम इस तरह पढ़ा
पिला दे फिर नज़र से मुझको साकी
मुझे मंजूर बेदारी नही है
राशिद ने अपना कलाम यूं पढा
ख़ुशियां बांटूं में सब को
लैलूं सबके सारे ग़म।
कामिल हयात ने अपने अशआर यूं पढ़े
सबको तो सुना सकते नही दिल की कहानी
सब लोग तो हमराज़ बनाये नही जाते ।
कारी उसामा ने अपनी बात कुछ यूं कही
बड़ों के सामने जबसे झुका कर सर में चलता हूं,
कोई भी सामने मेरे उठा कर सर नहीं चलता।
महताब आलम ने अपने अशआर पढ़ते हुए कहा कि,
अब तो जवान होगई औलाद भी तेरी
अब तो तेरे खयाल में कुछ गन्दगी न हो।
हाफिज़ अजमल ने पढ़ा कि
मुझ से सवाल करती रही ज़िन्दगी मेरी।
था ही नही जवाब मगर ढूंढता रहा।
यूनुस वफ़ा ने अपना कलाम कुछ इस तरह से पढ़ा
हम भी बड़े ज़िद्दी हैं तब तक नही मानेंगे
जब तक तेरे हाथों से तलवार न गिर जाए।
हाफिज़ ज़मीर ने अपने अशआर यूं पढ़े
हार तेरी ज़मीर है लाज़िम,
गर तेरी राज़दार है दुनिया।
मौ० कासिद ने अपना कलाम कुछ इस तरह पढा
हो गयी है दूरियां, अब लुत्फ जीने में कहा
बे मज़ा ही हो गयी है राज़दारी जिंदगी।
शाहिद हसन शाहिद ने अपना कलाम कुछ यूं पढा
वो हंस पड़ा मेरा किस्सा तमाम होने पर।
में रो पड़ा था जिसे दास्तां सुनाते हए।।
हाजी नसीरुद्दीन ने अपनी बात यूं कही
किसी से कोई भी उम्मीद मत रखना ज़माने में
शजर कोई भी साए में शजर होने नही देता।
देर रात तक चले प्रोग्राम में हाजी नसीरुद्दीन, यूनुस वफ़ा, मौ० कासिद, हाफिज़ कामिल, मौ० राशिद, यमली खां आदि लोगो ने भी अपने कलाम सुनाये। प्रोग्राम में अदनान, इलयास मलिक, मोहसिन करीम, इसरार क़ुरैशी, मास्टर फरीद, आकिल आलम, हाजी जावेद, असलम, उस्मान आदि लोग मौजूद रहे।

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