Exclusive: उत्तरकाशी:बगैर लाइसेंस व स्लाटर के कौन खा रहा है मीट व मुर्गे की टांग ?

Exclusive: उत्तरकाशी:बगैर लाइसेंस व स्लाटर के कौन खा रहा है मीट व मुर्गे की टांग ?

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संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी नगर का नदी आर-पार अब तो पालिका के अंतर्गत आ गया है। इससे पहले नदी पार पालिका के एरिया में नहीं था। कोर्ट के निर्देश की माने तो अब से 10 साल पहले की पालिका बोर्ड ने कोर्ट से नगर उत्तरकाशी मे मीट,अंडा,मुर्गा की बिक्री पर प्रतिबंध लगवाया था। लेकिन हाल के समय से अब नगर एरिया में भी मांस की दुकानें खुल गई हैं। किसके संरक्षण में औऱ कौन मीट व मुर्गे की टांग खा रहा है इसका पता नही अलबत्ता ये जरूर पता लगा है कि मांस की दुकानें बगैर लाइसेंस की हैं। उत्तरकाशी नगर में मीट का कारोबार नदी पार हुआ करता है। यहां भी नियम और कायदे कानून को ताक में रखकर सब कुछ हो रहा है। यहां लाइसेंस जिला पंचायत जारी करती है। एक लंबे समय तक कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर मीट के लाइसेंस पूर्व में जारी नहीं हुए थे। लेकिन बाद मे लाइसेंस जारी कर दिये गए। लाइसेंस हाई कोर्ट के उस आदेश के तहत जारी होने थे जिसमें उसने नदी से 100 मीटर दूर मांस की दुकान होने के साथ ही स्लाटर का होना भी अनिवार्य बताया था। अब अगर कोर्ट के इस आदेश को संज्ञान में लें तो उत्तरकाशी नगर में नदी के आर और पार जो भी दुकान है वह 50 मीटर के दायरे से भी कम दूरी पर है। स्लाटर हाउस कही नहीं है और लाइसेंस बनाने में गंगोरी मे दिखाए गए जिस स्लाटर हाउस का जिक्र है वह फर्जी है। वेटनरी डिपार्टमेंट से जब उत्तरकाशी नगर में कही स्लाटर हाउस होने की जानकारी ली तो उन्होंने स्लाटर हाउस होने से इनकार किया। मांस जो कट रहा है उस पर कभी किसी वेटनरी डॉ की जांच औऱ स्टाम्प भी लगी तो जवाब मिला नही मे। इसके पीछे जिला पंचायत या नगर पालिका का कोई लिखित पत्र बूचड़खानों के लिये मिलता तो जांच व मोहर भी लगती। बहरहाल गंगा के तट पर बसे उत्तरकाशी नगर के दोनों ओर 40 हजार की आबादी के लिये जिस तरह से मांस की दुकानें खुल रही है वह बगैर संरक्षण के आसान नहीं।

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